काठमांडू, छह अगस्त (एपी) नेपाल में इस महीने होने वाला तिब्बती अध्ययन सम्मेलन सरकारी अधिकारियों के अनुरोध पर रद्द कर दिया गया है। हालांकि, अधिकारियों ने इस फैसले का कोई कारण नहीं बताया। आयोजकों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
‘इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर तिब्बती स्टडीज’ का सम्मेलन नेपाल में 23 से 26 अगस्त को होना था। इसमें कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होने वाले थे और काठमांडू विश्वविद्यालय का ‘हिमालय सेंटर फॉर एशियन स्टडीज’ विभाग इसकी मेजबानी करने वाला था।
विभाग के प्रोफेसर सागर राज शर्मा ने पुष्टि की कि सरकार के शीर्ष अधिकारियों के सम्मेलन आयोजित नहीं करने के अनुरोध के बाद उन्होंने इसे रद्द करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए कोई विशेष कारण नहीं बताया गया।
सरकार की ओर से तुरंत कोई टिप्पणी नहीं आई लेकिन नेपाल के चीन के साथ लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं और उसने तिब्बत-समर्थक किसी भी गतिविधि की इजाजत नहीं दी है।
चीन का 1951 से तिब्बत पर शासन है, जब कम्युनिस्ट सेनाओं ने इस हिमालयी क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद दशकों तक राजनीतिक दमन का दौर चला जिसमें कुछ बौद्ध मठों को ध्वस्त किया गया और कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण से बाहर सभी तरह की राजनीतिक या सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को दबाया गया।
नेपाल में हजारों तिब्बती शरणार्थी रहते हैं और वे अपने आध्यात्मिक नेता दलाई लामा तक पहुंचने के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। दलाई लामा भारत में निर्वासन में रह रहे हैं। नेपाल का कहना है कि वह किसी भी मित्र देश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, रैली या गतिविधियों की अनुमति नहीं देगा।
नेपाल में रहने वाले शरणार्थियों ने कई बार विरोध-प्रदर्शन किए हैं, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया गया है।
नेपाल में हर साल दलाई लामा का जन्मदिन मनाया जाता है, लेकिन यह आयोजन बौद्ध मठों या स्कूलों के परिसर के भीतर ही होता है और पुलिस इस पर कड़ी नजर रखती है।
एपी सुरभि नरेश
नरेश