मुनीर ने पश्चिमी एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों के बीच ईरान के शीर्ष नेताओं से बातचीत की

मुनीर ने पश्चिमी एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों के बीच ईरान के शीर्ष नेताओं से बातचीत की

मुनीर ने पश्चिमी एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों के बीच ईरान के शीर्ष नेताओं से बातचीत की
Modified Date: May 23, 2026 / 08:55 pm IST
Published Date: May 23, 2026 8:55 pm IST

(सज्जाद हुसैन)

इस्लामाबाद, 23 मई (भाषा) पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने के लिए चल रही चर्चाओं के बीच तेहरान में मौजूद पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ के साथ अलग-अलग बातचीत की। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी।

पाकिस्तानी सेना ने बताया कि मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के प्रयासों को तेज करने के लिए एक महत्वपूर्ण यात्रा पर शुक्रवार को तेहरान पहुंचे। सेना ने कहा कि यह यात्रा ‘‘मध्यस्थता के जारी प्रयासों के तहत’’ की गई।

मुनीर के तेहरान पहुंचने पर ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी ने उनकी अगवानी की।

सेना ने बताया कि जब मुनीर वहां पहुंचे तो उनके करीबी माने जाने वाले एवं पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी पहले ही तेहरान में मौजूद थे और शीर्ष ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर रहे थे। यह महज एक महीने में मुनीर की ईरान की दूसरी यात्रा है।

ईरान सरकार द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, मुनीर ने तेहरान में अराघची से मुलाकात की और ‘‘तनाव को और बढ़ने से रोकने तथा पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजनयिक प्रयासों’’ पर चर्चा की।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (इरना) ने खबर दी कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत देर रात तक जारी रही।

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने बताया कि शनिवार को फील्ड मार्शल मुनीर ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ बातचीत की। एजेंसी के अनुसार, ‘‘दोनों पक्षों ने ईरान और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय घटनाक्रम और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।’’

समाचार एजेंसी के मुताबिक, मुनीर ने शनिवार को अलग से ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ से भी मुलाकात की और उनकी वार्ता ‘‘क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों’’ पर केंद्रित रही।

हालांकि, इस्लामाबाद ने इन बैठकों पर विशेष टिप्पणी नहीं की है।

पश्चिम एशिया संघर्ष में पाकिस्तान एक मध्यस्थ के रूप में उभरा है। इस संघर्ष के कारण गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हुआ है और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ा है। कई विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान को ईरान और अमेरिका दोनों का भरोसा हासिल है।

पिछले महीने पाकिस्तान इस्लामाबाद ने दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेताओं की वार्ता की मेजबानी की थी। 1979 के बाद यह अपनी तरह की पहली बातचीत थी, लेकिन दोनों पक्ष शांति समझौते तक नहीं पहुंच सके।

माना जाता है कि वार्ता में मुख्य अड़चनें ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हैं।

अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमले किए जाने के बाद से इस जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों का आवागमान बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस हमले के जवाब में ईरान ने भी जवाबी हमले किए हैं।

हालांकि, आठ अप्रैल से एक नाजुक युद्धविराम लागू है, लेकिन व्यवधान अब भी जारी हैं।

ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं, जब अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर अगर अंतिम समय की बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती है तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू करने पर ‘‘गंभीरता से विचार कर सकते हैं’’।

भाषा गोला धीरज

धीरज


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