ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय किराया वहनीयता योजना समाप्त, इसपर आश्रित लोगों के लिए अनिश्चितता

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ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय किराया वहनीयता योजना समाप्त, इसपर आश्रित लोगों के लिए अनिश्चितता

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  • Publish Date - July 2, 2026 / 03:51 PM IST,
    Updated On - July 2, 2026 / 03:51 PM IST

(स्टीवन रॉउले, कर्टिन विश्वविद्यालय)

मेलबर्न, दो जुलाई (द कन्वरसेशन) ऑस्टेलिया का वित्तीय वर्ष एक जुलाई को समाप्त हो गया और इसी के साथ ‘राष्ट्रीय किराया वहनीयता योजना’ भी समाप्त हो गई, जिसके तहत देश भर में 35,000 से ज़्यादा किफायती किराए के घर उपलब्ध कराए गए थे।

यह योजना 2008 में रड सरकार ने घरों के महंगे होते जाने की समस्या के मद्देनजर शुरू की थी। लेकिन बाद में 2014 में एबॉट सरकार ने इसे बंद कर दिया और 2016 के बाद किसी भी नए घर को इसके तहत मंज़ूरी नहीं दी गई। इस जून में, आखिरी 3,600 संपत्तियां भी इस योजना के दायरे से बाहर हो गई हैं।

आखिरकार, इस योजना ने अपने कुछ मुख्य वादे पूरे किए। इसने काफी कम समय में किफायती किराए के घरों की आपूर्ति बढ़ाई और ऐसे घर बनाए जो इसके बिना नहीं बन पाते।

लेकिन इसके आलोचक भी रहे हैं, जिन्होंने इसे लागू करने के तरीके और इसके नतीजों में कई कमियां गिनाईं। तो, पीछे मुड़कर देखें तो इस अनुभव से हम क्या सीख सकते हैं? और क्या सरकार ने इस योजना के बंद होने से आई रिक्तता को दूर करने के लिए कोई कदम उठाया है?

हाशिये पर रह रहे समूह के लिए सस्ता किराया

इस योजना के तहत डेवलपर्स को किफायती किराये के घर उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन दिया गया। यह प्रोत्साहन सूचकांक-आधारित कर छूट के रूप में था, जो 2026 तक प्रति घर 13,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक हो गया।

इसकी शर्त थी कि घर नए होने चाहिए थे और उन्हें स्थानीय औसत किराए के मुकाबले 80 प्रतिशत से कम किराए पर दिया जाना था।

ये प्रोत्साहन केवल दस वर्षों के लिए ही थे, इसलिए वर्ष 2018 से संपत्तियां चरणबद्ध तरीके से इस योजना से बाहर होती रही हैं। वर्ष 2016 में स्वीकृत संपत्तियों का आखिरी समूह भी इस वर्ष योजना से बाहर हो गया।

इस योजना का लाभ लेने के लिए, किराएदारों की आय इतनी होनी चाहिए थी कि जिससे वे ‘सोशल हाउसिंग’ के लिए योग्य न हों, लेकिन आम तौर पर राज्य की औसत आय से कम हो। इस श्रेणी में नए शिक्षक, सफ़ाई कर्मचारी और बच्चों की देखभाल करने वाले कर्मचारी जैसे आवश्यक सेवाओं में संलग्न लोग आते हैं।

क्या यह योजना कुछ ज़्यादा ही उदार थी?

हालांकि 13 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर सुनने में बहुत ज़्यादा नहीं लगता, लेकिन यह बाजार आधारित किराए पर मिलने वाली 20 प्रतिशत रियायत से कहीं ज़्यादा है। कुछ जानकारों, जिनमें ग्रैटन इंस्टीट्यूट भी शामिल है, ने पहले यह दलील दी थी कि इस योजना से डेवलपर्स को बहुत ज़्यादा फ़ायदा हुआ।

हालांकि, योजना के तहत मिलने वाले आधे से ज़्यादा प्रोत्साहन परमार्थ संस्थाओं को मिले; विक्टोरिया राज्य में यह आंकड़ा 73 प्रतिशत था, जबकि साउथ ऑस्ट्रेलिया में यह 32 प्रतिशत रहा।

किस तरह के घर दिए गए?

बनाए गए घर आम तौर पर छोटे थे। आधे से ज्यादा घर अपार्टमेंट या स्टूडियो थे और दो-तिहाई से ज़्यादा घर दो-बेडरूम या उससे छोटे थे।

हम क्या सीख सकते हैं?

मैं 2016 में ‘ऑस्ट्रेलियन हाउसिंग एंड अर्बन रिसर्च इंस्टीट्यूट’ द्वारा वित्तपोषित एक अनुसंधान परियोजना का मुख्य शोधपत्र लेखक था, जिसने इस योजना का मूल्यांकन किया था। इस अनुसंधान में कई सकारात्मक और नकारात्मक बातें सामने आईं।

इस योजना का सकारात्मक पहलू जो हमने अपने अनुंसधान में पाया वह ये था कि कम मध्यम आय वाले उन लोगों के लिए किफायती घर उपलब्ध हुए, जिन्हें अक्सर किफायती घरों की चर्चा में नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। बहुत कम समय में घरों की आपूर्ति तेज़ी से बढ़ी और ऐसे घर बने जो शायद इसके बिना नहीं बन पाते।

लेकिन इसमें कई खामियां भी थीं, जैसे संघीय और प्रांतीय सरकार की प्रक्रियाओं में विभाजन की वजह से इसका प्रबंधन मुश्किल हो गया। संस्थागत निवेश हासिल करने के लिए दस साल का समय बहुत कम था। इसके अनचाहे नतीजे भी सामने आए, जैसे छात्रों के निवास के लिए बहुत अधिक वित्तपोषण, मानक प्रोत्साहन भुगतान की वजह से छोटे घरों के निर्माण को ज़्यादा बढ़ावा मिला।

क्या सरकार को इसके स्थान पर कोई अन्य योजना लानी चाहिए?

हालांकि संघीय सरकार ने ‘हाउसिंग ऑस्ट्रेलिया फ़्यूचर फ़ंड’ के ज़रिए सस्ते घरों के लिए वित्तपोषण में वृद्धि की है, लेकिन इससे घरों के मामले में उतने तेज़ी से नतीजे नहीं मिले हैं, जितने ‘राष्ट्रीय किराया वहनीयता योजना’ ने अपने कम समय के कार्यकाल में हासिल किए थे।

सरकारी नीति में आवास की आपूर्ति बढ़ाने पर जोर है, लेकिन हैरानी की बात है कि राज्य या संघीय सरकारों ने ‘राष्ट्रीय किराया वहनीयता योजना’ का कोई विकल्प पेश नहीं किया है,जिसमें पुरानी योजना वाली खामियां न हों – ताकि नए बने किफायती घरों में निजी क्षेत्र से सीधे निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।

(द कन्वरसेशन) धीरज पवनेश

पवनेश