(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, 19 सितंबर (भाषा) नेपाल सरकार ने पिछले महीने आई भीषण बाढ़ के कारणों की जांच के लिए सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
इस बाढ़ में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 6,000 से ज्यादा लोग लापता हो गए।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई। हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी में बाढ़ से मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा।
मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी टीकाराम बराल के अनुसार, ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय ने जल विज्ञान, हिमनद विज्ञान, रिमोट सेंसिंग, भूविज्ञान, जलविद्युत बुनियादी ढांचे और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया है।
जल नीति और प्रशासन विशेषज्ञ देबेश बेलबासे की अध्यक्षता वाली इस समिति में जल विज्ञानी नरेंद्र मान शाक्य, हिमनद विज्ञानी रिजान भक्त कायस्थ, रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ उत्तम बाबू श्रेष्ठ, जलविद्युत बुनियादी ढांचा विशेषज्ञ हरि पंडित, भूविज्ञानी मेघरज धिताल और आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ अनिल पोखरेल शामिल हैं।
बराल ने कहा कि समिति यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ का वास्तविक कारण क्या था, आपदा किस तरह सामने आई और क्या जलवायु परिवर्तन की इसमें कोई भूमिका थी।
बराल ने कहा कि समिति को एक महीने के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर वह आपदा के अधिक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन की सिफारिश भी कर सकती है।
भाषा आशीष माधव
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