(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, 17 सितंबर (भाषा) नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाली आपदाओं से बेहतर तरीके से निपटने के लिए उनके देश को अपनी संस्थाओं को मजबूत करने और अपनी कूटनीतिक भूमिका का विस्तार करने की जरूरत है।
नेपाली संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की अंतरराष्ट्रीय संबंध और पर्यटन समिति की बैठक में, खनाल ने कहा कि हाल ही में आई भोटेकोशी बाढ़ ने सरकार को जलवायु से जुड़ी आपदाओं के प्रति अपने दृष्टिकोण पर फिर से विचार करने के लिए प्रेरित किया है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन होने और चट्टानों के खिसकने के कारण आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, जिसमें 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 6,000 से ज़्यादा लोग लापता हैं।
बाढ़ को ‘‘हिमालयी सुनामी’’ बताते हुए खनाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन के असर को कम करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘बाढ़ की आपदा ने नेपाल की समृद्धि की यात्रा और विकास के बुनियादी ढांचे के विस्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नदी के किनारे बसे इलाके, मानव बस्तियां और पनबिजली परियोजनाएं जलवायु परिवर्तन की विभिषिका का सामना कर रहे हैं। इसलिए, हमारे लिए पारंपरिक तरीकों से हटकर सोचना बहुत जरूरी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 25 साल में हुए विकास को नुकसान पहुंचा है, जिससे हमें खुशहाली की कहानी पर फिर से सोचने की ज़रूरत पड़ गई है।’’
खनाल ने कहा, ‘‘इस मुश्किल हालात से निपटने के लिए सिर्फ एक मंत्रालय की कोशिशों या इस आपदा को एक अलग-थलग घटना मानने के बजाय, ‘समग्र सरकार’ के स्तर पर मिलकर काम करने की जरूरत है।’’
खनाल ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेपाल की स्थिति को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक डेटा और सबूतों पर आधारित पैरोकारी की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि देश को संयुक्त राष्ट्र महासभा जैसे वैश्विक सम्मेलनों में सिर्फ तुरंत होने वाले समझौतों पर ध्यान देने के बजाय, जलवायु परिवर्तन पर एक व्यापक एजेंडा तैयार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र महासभा जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मुद्दों पर वार्ता करने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें करने का एक मौका होगा।’’
मंत्री ने यह भी कहा कि आपदा के बाद की जरूरतों का आकलन पूरा करने के बाद, सरकार आपदा से उबरने में मदद के लिए मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से औपचारिक रूप से संपर्क करने की योजना बना रही है।
भाषा सुभाष माधव
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