(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, आठ मई (भाषा) नेपाल ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत के साथ सीमा विवाद को राजनयिक माध्यमों से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा, ‘‘हम लिपुलेख के संबंध में अपने विचार पहले ही सार्वजनिक कर चुके हैं। हमने नेपाली क्षेत्र लिपुलेख से होकर भारत और चीन के बीच प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा के संबंध में भी अपनी राय व्यक्त की है।’’
छेत्री ने कहा कि नेपाल और भारत के घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंधों की भावना के अनुरूप नेपाल इस मुद्दे को हल करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, ‘‘नेपाल सरकार ऐतिहासिक समझौतों, तथ्यों, नक्शों और साक्ष्यों के आधार पर राजनयिक माध्यमों से सीमा संबंधी मुद्दों को हल करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।’’
नेपाल की यह टिप्पणी भारत द्वारा उत्तराखंड के पुराने लिपुलेख दर्रे से होकर आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर हिमालयी देश की आपत्ति को दृढ़ता से खारिज करने के कुछ दिनों बाद आई है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने लिपुलेख दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारत और चीन द्वारा की जा रही तैयारियों पर आपत्ति जताई थी, और दावा किया कि यह क्षेत्र नेपाल का है।
इसके बाद भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि इस क्षेत्र पर किए गए दावों को नयी दिल्ली ‘‘एकतरफा कृत्रिम विस्तार’’ मानती है और ये दावे अस्वीकार्य हैं।
छेत्री ने कहा कि महाकाली नदी के पूर्व में स्थित लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र ‘‘1816 की सुगौली संधि के आधार पर नेपाल के अविभाज्य अंग हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने भारत और चीन दोनों को अपना रुख और चिंता पहले ही बता दी है।’’
भाषा शफीक अविनाश
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