(अदिति खन्ना)
लंदन, 18 मार्च (भाषा) फरार हीरा कारोबारी नीरव मोदी की उस अर्जी पर सुनवाई लंदन के उच्च न्यायालय में पूरी हो गई जिसमें उसने अपनी प्रत्यर्पण याचिका पर फिर से विचार किए जाने का अनुरोध किया था।
इस अर्जी में दावा किया गया है कि भारत में जांच एजेंसियों द्वारा पूछताछ किए जाने के दौरान उसे ‘‘यातना दिए जाने का खतरा’’ है।
‘रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस’ में अपील की सुनवाई कर रहे लॉर्ड जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे ने मंगलवार को दिनभर चली सुनवाई के अंत में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
स्टुअर्ट-स्मिथ ने कहा, ‘‘यह मामला मोदी और भारत से आए भारतीय अधिकारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम यथाशीघ्र फैसला सुनाएंगे।’’
इसके साथ ही दो दिन के लिए सूचीबद्ध सुनवाई तय समय से पहले समाप्त हो गई।
भारत में करीब दो अरब अमेरिकी डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ऋण घोटाला मामले में धोखाधड़ी और धनशोधन के आरोपों में मुकदमे का सामना करने के लिए वांछित 54 वर्षीय कारोबारी उत्तरी लंदन की पेंटनविल जेल से वीडियो लिंक के जरिये पेश हुआ।
उसके वकीलों ने अपना पक्ष रखने के लिए संजय भंडारी के प्रत्यर्पण मामले का काफी हद तक सहारा लिया। रक्षा क्षेत्र के सलाहकार भंडारी पर कर चोरी और धनशोधन के आरोप हैं। भंडारी के प्रत्यर्पण के अनुरोध को ब्रिटेन की एक अदालत ने खारिज कर दिया था।
अदालत में भारत सरकार का पक्ष रख रही ‘क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस’ (सीपीएस) ने नीरव संबंधी मामले को फिर से खोलने के आधारों का विरोध किया। नीरव के प्रत्यर्पण का आदेश करीब छह साल पहले दिया गया था।
नीरव की ओर से पैरवी कर रहे वकील एडवर्ड फिट्जजेराल्ड किंग्स केसी ने दलील दी कि प्रत्यर्पण से भारत में नीरव से पूछताछ के दौरान अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार अथवा यातना का वास्तविक खतरा है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन हीरा कारोबारी के खिलाफ अतिरिक्त गैर-जमानती वारंट जारी होने की संभावना से उत्पन्न जोखिम से निपटने के लिए ‘‘न तो पर्याप्त हैं और न ही विश्वसनीय।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को मुंबई की आर्थर रोड जेल से गुजरात भी ले जाया जा सकता है ताकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अलावा अन्य एजेंसियां उससे पूछताछ कर सकें।
सीपीएस की अधिवक्ता हेलेन मैलकम केसी ने भारत के इस पक्ष पर जोर दिया कि नीरव की अर्जी न केवल तय समय के बाद दायर की गई, बल्कि यह ‘‘झूठे आधार’’ पर भी आधारित है।
उन्होंने अदालत से ‘‘सामान्य समझ वाला दृष्टिकोण’’ अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यह मामला ‘‘पूरी तरह असाधारण है और इसमें महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक कारक शामिल हैं’’ जो यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन न हो।
उन्होंने कहा कि ऐसा (आश्वासन का उल्लंघन) न होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि इसका भारत और ब्रिटेन के बीच भविष्य की प्रत्यर्पण कार्यवाहियों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अदालती दस्तावेजों में कहा गया है, ‘‘जहां तक इस तरह के किसी सुझाव का सवाल है कि इन आश्वासनों से गुप्त तरीके से पीछे हटा जा सकता है, तो नीरव दीपक मोदी और उसके मामले के चर्चित होने के कारण यह एक अवास्तविक संभावना है।’’
यदि नीरव मोदी की यह अर्जी खारिज हो जाती है तो उसके प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो जाने की संभावना है। भाषा सिम्मी शोभना
शोभना