Pradyumn Vinayak Chaturthi 2026: गणपति बप्पा का यह खास व्रत 18 जून को! करें ये एक छोटा सा उपाय…घर में बनी रहेगी बरकत और दूर होंगे सभी विघ्न

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Pradyumn Vinayak Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है और हर शुभ कार्य की शुरुआत उनकी पूजा से होती है। प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व होता है जो इस साल जून में मनाई जाएगी। इस दिन व्रत, पूजा विधि और उपायों का खास महत्व बताया गया है।

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  • Publish Date - June 17, 2026 / 11:54 AM IST,
    Updated On - June 17, 2026 / 11:56 AM IST

(Pradyumn Vinayak Chaturthi 2026/ Image Credit: AI-generated)

HIGHLIGHTS
  • प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी व्रत 18 जून 2026 को है।
  • भगवान गणेश को समर्पित यह विशेष चतुर्थी मानी जाती है।
  • 21 दूर्वा और मोदक का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

Pradyumn Vinayak Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनकी पूजा से ही की जाती है। हर महीने आने वाली चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। लेकिन ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व बताया गया है। इसे प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस वर्ष यह व्रत गुरुवार 18 जून 2026 को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करने से जीवन की सारी बाधाएं दूर होते हैं।

तिथि और शुभ समय की जानकारी

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 17 जून 2026 को रात 9 बजकर 38 मिनट पर शुरू होगी और 18 जून 2026 को शाम 6 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। चूंकि उदया तिथि 18 जून को पड़ रही है इसलिए व्रत इसी दिन रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उदया तिथि में किया गया व्रत अधिक फलदायी माना जाता है और इसका विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी की पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पूजा स्थल को साफ करें। भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें लाल या पीले फूल अर्पित करें। दूर्वा, सिंदूर, अक्षत और मोदक का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके बाद गणेश मंत्रों का जाप करें और गणेश चालीसा का पाठ करें। पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को आरती करें और प्रसाद को सभी में बांट दें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

शुभ उपाय और मान्यताएं

इस दिन कुछ सरल उपाय करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त 21 दूर्वा अर्पित करें और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। जो गणेश जी को बहुत प्रिय हैं। ‘ॐ गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करना भी शुभ माना जाता है। घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाना भी अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि इन उपायों से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है तथा नकारात्मकता दूर होती है।

व्रत का महत्व

प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी व्रत को बहुत फलदायी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर घर की परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ती है और आर्थिक समस्याएं कम होती हैं। इसके अलावा संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों के लिए भी यह व्रत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन गणेश जी की आराधना से जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।

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प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी 2026 कब है?

यह व्रत 18 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

इस व्रत का महत्व क्या है?

इस दिन गणेश जी की पूजा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है।

पूजा में क्या सामग्री इस्तेमाल होती है?

दूर्वा, सिंदूर, अक्षत, लाल-पीले फूल और मोदक का भोग लगाया जाता है।

इस दिन कौन सा मंत्र जपना शुभ है?

“ॐ गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।