भारत के अपने राजनायिकों के परिजनों को वापस बुलाने का कोई कारण नहीं: बांग्लादेश

भारत के अपने राजनायिकों के परिजनों को वापस बुलाने का कोई कारण नहीं: बांग्लादेश

भारत के अपने राजनायिकों के परिजनों को वापस बुलाने का कोई कारण नहीं: बांग्लादेश
Modified Date: January 28, 2026 / 10:11 pm IST
Published Date: January 28, 2026 10:11 pm IST

ढाका, 28 जनवरी (भाषा) बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने बुधवार को कहा कि भारत के अपने राजनयिकों के परिजनों को बांग्लादेश से वापस बुलाने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि देश में ऐसी कोई सुरक्षा स्थिति नहीं है, जिससे विदेशी अधिकारियों या उनके परिवारों को खतरा हो।

भारत ने पिछले हफ्ते बांग्लादेश में बढ़ती चरमपंथी गतिविधियों के मद्देनजर सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए वहां तैनात भारतीय अधिकारियों के परिजनों को वापस बुलाने का फैसला किया था। यह कदम बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से कुछ सप्ताह पहले उठाया गया।

ढाका स्थित उच्चायोग के अलावा भारत के बांग्लादेश के खुलना, चट्टोग्राम, राजशाही और सिलहट में भी राजनयिक कार्यालय हैं।

विदेश मंत्रालय में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए हुसैन ने कहा, “यहां ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिससे यह संकेत मिले कि भारतीय राजनयिकों या उनके परिवारों को कोई खतरा है।”

उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से उनका आंतरिक मामला है। भारत किसी भी समय अपने अधिकारियों या उनके परिवारों को वापस बुला सकता है।”

हुसैन ने कहा कि बांग्लादेश को भारत की ओर से सुरक्षा चिंताओं को लेकर कोई औपचारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

उन्होंने कहा, “संभव है कि भारत को कोई आशंका हो या वह कोई संदेश देना चाहता हो, लेकिन मैं इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं देख पा रहा हूं।”

हुसैन इससे पहले भारत में उप-उच्चायुक्त के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर भारतीय राजनयिक अपने परिजनों को वापस भेजना चाहते हैं, तो बांग्लादेश को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

उन्होंने कहा, “अगर वे ऐसा करना चाहते हैं, तो हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।”

इस बीच, ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग समेत बांग्लादेश में भारत के सभी पांच राजनयिक मिशन सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।

भारतीय उच्चायोग ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक समारोह का भी आयोजन किया था।

भाषा राखी पारुल

पारुल


लेखक के बारे में