जन्म के सौ वर्ष बाद भी ब्रिटिश राजशाही पर छाया महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का प्रभाव

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जन्म के सौ वर्ष बाद भी ब्रिटिश राजशाही पर छाया महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का प्रभाव

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  • Publish Date - April 21, 2026 / 11:47 AM IST,
    Updated On - April 21, 2026 / 11:47 AM IST

लंदन, 21 अप्रैल (एपी) ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की विरासत उनके जन्म के 100 वर्ष बाद भी राजशाही पर साफ नजर आती है।

बकिंघम पैलेस के सामने स्थित ‘कूल ब्रिटानिया’ नामक उपहार की दुकान में उनकी तस्वीर वाले मग, तौलिये और की-रिंग की बिक्री अब भी खूब होती है जबकि महाराजा चार्ल्स तृतीय से जुड़े उत्पादों की मांग अपेक्षाकृत कम है। दुकान के प्रबंधक इस्माइल इब्राहिम ने बताया कि महारानी से जुड़े उत्पाद आज भी अधिक बिकते हैं।

सितंबर 2022 में निधन से पहले, 70 वर्षों तक शासन करने वाली एलिजाबेथ द्वितीय ने युद्ध के बाद कठिन दौर से लेकर कोविड-19 महामारी तक ब्रिटेन को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाई थी।

अब भी वही महारानी

एलिजाबेथ के निधन के समय ज्यादातर ब्रिटिश नागरिकों ने अपने जीवन में केवल उन्हें ही साम्राज्ञी के रूप में देखा था। आज भी “क्वीन” शब्द सुनते ही लोगों के मन में एलिजाबेथ की छवि उभरती है, न कि चार्ल्स की पत्नी क्वीन कैमिला की।

हालांकि समय के साथ उनकी विरासत पर कुछ सवाल भी उठे हैं। उनके पुत्र प्रिंस एंड्रयू के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से संबंधों को लेकर विवाद ने सवाल उठाया कि इस मुद्दे को लंबे समय तक क्यों नहीं सुलझाया गया।

‘‘आफ्टर एलिजाबेथ : कैन द मोनार्की सेव इटसेल्फ ?’’ पुस्तक के लेखक एड ओवेन्स ने कहा कि एलिजाबेथ द्वितीय पिछले 100 वर्षों में राजशाही की सबसे महत्वपूर्ण शख्सियत रही हैं और उनकी 100वीं जयंती पर स्वाभाविक रूप से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

इस अवसर पर बकिंघम पैलेस में समारोह, रीजेंट्स पार्क में स्मारक उद्यान का उद्घाटन और उनकी वेशभूषा पर प्रदर्शनी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

अप्रत्याशित रूप से मिला सिंहासन

21 अप्रैल 1926 को जन्मी एलिजाबेथ को प्रारंभ में सिंहासन का उत्तराधिकारी नहीं माना गया था। लेकिन 1936 में उनके चाचा किंग एडवर्ड अष्टम के त्यागपत्र के बाद उनके पिता जॉर्ज षष्ठम राजा बने और एलिजाबेथ उत्तराधिकारी बन गईं।

छह फरवरी 1952 को पिता के निधन के बाद 25 वर्ष की आयु में उन्होंने गद्दी संभाली।

वैश्विक प्रतिनिधि की भूमिका

महारानी ने दशकों तक संसद के उद्घाटन, विदेशी नेताओं के स्वागत और देशभर में हजारों सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लिया। उन्होंने 200 से अधिक विदेशी यात्राएं कर भारत, तंजानिया, जर्मनी, जापान और अमेरिका सहित कई देशों के साथ संबंध मजबूत किए।

जीवन के अंतिम वर्षों में वह इंटरनेट पर भी लोकप्रिय रहीं, जब उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में अभिनेता डेनियल क्रेग के साथ विशेष प्रस्तुति दी और अपने शासन के 70 वर्ष पूरे होने पर ‘पैडिंगटन बेयर’ के साथ दिखाई दीं।

विवाद की छाया

उनकी उपलब्धियों के बावजूद प्रिंस एंड्रयू से जुड़े विवाद को समय रहते नियंत्रित न कर पाना उनकी एक प्रमुख विफलता माना जाता है। अंततः महाराजा चार्ल्स तृतीय ने एंड्रयू से शाही उपाधि वापस ले ली और अब उन्हें केवल एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर के नाम से जाना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन विवादों के बावजूद एलिजाबेथ द्वितीय की उपलब्धियां उनकी गलतियों से कहीं अधिक बड़ी हैं।

उन्होंने ऐसे दौर में शासन शुरू किया जब जेट यात्रा भी आम नहीं थी और चंद्रमा पर जाने की कल्पना तक नहीं की गई थी, लेकिन अंतत: उनकी उपस्थिति लंबे समय तक ब्रिटिश सार्वजनिक जीवन में बनी रही।

इतिहासकार जहां उनकी विरासत पर बहस कर रहे हैं, वहीं आम लोग भी अपनी राय बना रहे हैं। फ्रांस से आई एक पर्यटक सिल्वी डेनेक्स ने उन्हें ‘शालीन और प्रतीकात्मक व्यक्तित्व’ बताया। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि विवादों को समय पर न सुलझाना एक गलती थी।

एपी मनीषा वैभव

वैभव