पाकिस्तान बना रहा नयी आंतरिक सुरक्षा नीति, आतंकवाद के वित्तपोषण रोकने पर जोर
पाकिस्तान बना रहा नयी आंतरिक सुरक्षा नीति, आतंकवाद के वित्तपोषण रोकने पर जोर
(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, चार जून (भाषा) पाकिस्तान एक नयी आंतरिक सुरक्षा नीति पर काम कर रहा है, जिसका मकसद आपराधिक डेटाबेस को एकीकृत करके और प्रांतों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था सुधारकर आतंकवाद के वित्तपोषण पर लगाम लगाना है।
प्रस्तावित राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा नीति 2026-30 पर इसी महीने नेशनल पुलिस मैनेजमेंट बोर्ड (एनपीएमबी) की एक ‘‘असाधारण बैठक’’ में चर्चा होगी और इसमें सभी प्रांतीय पुलिस प्रमुखों की सिफारिशें शामिल की जाएंगी।
‘डॉन’ अखबार की खबर में बृहस्पतिवार को कहा गया कि इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान के पुलिस प्रमुखों के सुझाव भी लिए जाएंगे।
खबर के अनुसार प्रस्तावों में गिलगित-बाल्टिस्तान में ‘काउंटर-टेररिज्म डिपार्टमेंट’ (सीटीडी) की स्थापना, राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस डेटा का एकीकरण, अंतर-प्रांतीय खुफिया साझाकरण तंत्र में सुधार और आतंकवाद के वित्तपोषण रोकने के उपाय शामिल हैं।
इस नीति में राष्ट्रीय पुलिस ब्यूरो (एनपीबी) के देशव्यापी पुलिस सुधारों और सुरक्षा रणनीतियों में बड़ी भूमिका की परिकल्पना की गई है। ब्यूरो की अध्यक्षता फिलहाल संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के महानिदेशक उस्मान अनवर कर रहे हैं।
अनवर ने ‘डॉन’ से कहा कि विभिन्न असैन्य कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच ‘‘गंभीर तालमेल की कमी’’ है। उन्होंने पूरे देश में पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी प्रांतों में एक समान पुलिसिंग तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवाद से लड़ने और आतंकी वित्तपोषण पर लगाम लगाने के लिए प्रांतों में एकसमान तंत्र स्थापित करना और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ सहयोग करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।’’
अनवर ने बताया कि आगामी बैठक में कार्यात्मक विशेषज्ञता, पुलिस कल्याण, अंतरराष्ट्रीय अपराध, आपराधिक डेटा एकीकरण, प्रशिक्षण जरूरतें, महिला पुलिस नेटवर्किंग, अंतर-प्रांतीय खुफिया साझाकरण और गिलगित-बाल्टिस्तान में सीटीडी के विकास पर भी चर्चा होगी।
यह प्रस्तावित नीति ऐसे समय में अहमियत रखती है जब पाकिस्तान के कई हिस्सों में आतंकवादी हमलों में वृद्धि देखी गई है और सुरक्षा प्रतिष्ठान आंतरिक सुरक्षा मजबूत करने की कोशिशों में जुटे हैं।
भाषा खारी वैभव
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