मध्यस्थ पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए

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मध्यस्थ पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए

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  • Publish Date - June 18, 2026 / 04:24 PM IST,
    Updated On - June 18, 2026 / 04:24 PM IST

( सज्जाद हुसैन )

इस्लामाबाद, 18 जून (भाषा) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के उद्देश्य से तैयार ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (इस्लामाबाद एमओयू) पर बृहस्पतिवार को हस्ताक्षर कर दिए।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि वह इस वार्ता प्रक्रिया के प्रमुख मध्यस्थ के रूप में इस समझौते के गारंटर बने हैं।

इस दस्तावेज पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन बुधवार को हस्ताक्षर कर चुके हैं।

वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए इस समझौता ज्ञापन पर शहबाज शरीफ के हस्ताक्षर ऐसे समय हुए हैं, जब एक दिन बाद स्विट्जरलैंड में इसके लिए औपचारिक समारोह आयोजित होने वाला है। इस समारोह में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रमुख वार्ताकार शामिल हो सकते हैं।

शरीफ के कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मोहम्मद शहबाज शरीफ ने गारंटर के रूप में ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर किए हैं। ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के हस्ताक्षर पहले से मौजूद हैं।’’

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बृहस्पतिवार को दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते हुए शरीफ की तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

शहबाज ने कहा कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन को मध्यस्थ के रूप में स्वयं उन्होंने भी अनुमोदित किया है।

ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इससे पहले उन्होंने ‘जी-7’ शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रात्रिभोज किया था। बाद में ईरानी मीडिया ने राष्ट्रपति पेजेश्कियन की तस्वीरें जारी कीं, जिनमें वह कैमरे के सामने हस्ताक्षरित दस्तावेज की प्रति हाथ में लिए दिखाई दिए।

शरीफ ने बृहस्पतिवार को कहा कि दोनों देशों की सरकारों के शीर्ष नेतृत्व द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर किया जाना संघर्ष के कूटनीतिक समाधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने इस प्रक्रिया में योगदान के लिए सऊदी अरब, कतर, तुर्किये और मिस्र जैसे पश्चिम एशियाई देशों का भी आभार व्यक्त किया।

शरीफ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि आज अमेरिका और ईरान के इस्लामी गणराज्य के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (एमओयू) पर डिजिटल हस्ताक्षर किए गए हैं।”

उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा, “इस्लामाबाद एमओयू तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इसके तहत पहले कदम के रूप में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलेगा, जबकि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी तत्काल प्रभाव से हटा लेगा।”

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।

ऊर्जा क्षेत्र के दृष्टिकोण से यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है और वैश्विक समुद्री व्यापार के सबसे व्यस्त तथा सामरिक रूप से सबसे अहम नौवहन मार्गों में इसकी गिनती होती है।

अमेरिका और इजराइल की ओर से 28 फरवरी से ईरान पर संयुक्त रूप से हमला किए जाने के बाद से यह मार्ग बंद है।

शहबाज ने ट्रंप को भी बधाई देते हुए उनकी सराहना की और कहा कि कूटनीति के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देने के दृष्टिकोण ने एक बार फिर ऐसे संघर्ष को समाप्त करने में मदद की है, जो क्षेत्र और उससे बाहर के देशों के लिए विनाशकारी परिणाम लेकर आ सकता था।

उन्होंने इस उपलब्धि में योगदान के लिए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर सहित अमेरिकी वार्ता दल के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

शहबाज ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मुजतबा हुसैनी खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के प्रति भी ‘‘सम्मान और आभार’’ व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने शांति का मार्ग अपनाने में बुद्धिमत्ता, दूरदर्शिता और कूटनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया।

उन्होंने मोहम्मद बगर गालिबाफ, अब्बास अराघची और एस्कंदर मोमेनी सहित ईरानी वार्ता दल के सदस्यों के प्रयासों की भी सराहना की।

शरीफ ने कहा कि उनके धैर्य, दृढ़ता और रचनात्मक संवाद के प्रति प्रतिबद्धता ने इस समझौते को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं विशेष रूप से कतर के नेतृत्व के ईमानदार प्रयासों और रचनात्मक सहयोग को स्वीकार करना चाहता हूं, जिसने हमें शांति समझौते तक पहुंचाने में मदद की। मैं सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के नेतृत्व की भी इस संबंध में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका और अमूल्य योगदान के लिए सराहना करता हूं।’’

उन्होंने पाकिस्तान की सेना के प्रमुख आसिम मुनीर का भी उल्लेख किया।

भाषा

खारी मनीषा

मनीषा