प्रधानमंत्री ने विनाशकारी बाढ़ की वजह जलवायु परिवर्तन को बताया, वैश्विक जिम्मेदारी की मांग की

प्रधानमंत्री ने विनाशकारी बाढ़ की वजह जलवायु परिवर्तन को बताया, वैश्विक जिम्मेदारी की मांग की

प्रधानमंत्री ने विनाशकारी बाढ़ की वजह जलवायु परिवर्तन को बताया, वैश्विक जिम्मेदारी की मांग की
Modified Date: September 2, 2026 / 07:31 pm IST
Published Date: September 2, 2026 7:31 pm IST

(शिरीष बी प्रधान)

काठमांडू, दो सितंबर (भाषा) नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बुधवार को कहा कि भोटेकोशी नदी में भयावह बाढ़ आने से मची तबाही जलवायु परिवर्तन के कारण हुई और इसके प्रभावों को कम करने करने की जिम्मेदारी भी वैश्विक समुदाय पर है।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, जिसमें 1,100 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 4,800 से ज्यादा लोग लापता हैं।

बाढ़ से हुई तबाही के बारे में नेपाल की संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा को जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह घटना प्रदर्शित करती है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से पर्वतीय इलाकों के लोगों को बढ़ते जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन के लिए विश्व के सभी देश जिम्मेदार हैं। और इसके प्रभाव को संभालने और कम करने की जिम्मेदारी भी वैश्विक समुदाय की है।’’

बालेंद्र शाह ने कहा, ‘‘संकट की इस घड़ी में हमने यह सच्चाई स्वीकार कर ली है कि देश के नेतृत्व को हिम्मत, समर्थन और भरोसा देना चाहिए, न कि आंसू।’’ उन्होंने कहा कि इस आपदा ने न केवल तीन जिलों – रसुवा, नुवाकोट और धादिंग – को तबाह किया है, बल्कि यह ‘‘पूरे देश के लिए एक आघात है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे पास दृढ़ संकल्प और साहस के साथ लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है और हम लड़ रहे हैं।’’

अंतरराष्ट्रीय मदद के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘इतने बड़े संकट के समय अंतरराष्ट्रीय सहायता न लेने का तो सवाल ही नहीं उठता, और हमने शुरू से ही मदद और सहयोग पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ तालमेल बिठाया है।’’

मीडिया के एक वर्ग ने पहले खबर दी थी कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार कर दिया है। हालांकि, बाद में सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार करने की बात को गलत बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘अब तक भारत, पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कतर, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन, जापान और सिंगापुर जैसे मित्र देशों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए मदद दी है।’’

उन्होंने बताया कि बुधवार दोपहर तक प्रधानमंत्री राहत कोष में 7 अरब नेपाली रुपये से अधिक रकम जमा हो चुकी है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह, एशियाई विकास बैंक(एडीबी), विश्व बैंक, यूरोपीय संघ (ईयू) और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय विकास साझेदारों ने भी मदद करने का वादा किया है।’’

प्रधानमंत्री ने सदन को बताया कि जलविद्युत परियोजनाओं वाली जगहों पर बचाव कार्यों के लिए भारत, चीन और दक्षिण कोरिया से विशेषज्ञों के दल भेजे जा रहे हैं।

बचाव और राहत कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य चलाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया है, जबकि स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा है।

उन्होंने कहा कि सेना और निजी हेलीकॉप्टर बचाव कार्य और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने में जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने पीड़ितों के परिवारों के लिए आर्थिक मदद को मंज़ूरी दे दी है और प्रभावित इलाकों को तीन महीने के लिए संकटग्रस्त घोषित किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार घायलों का मुफ्त इलाज कर रही है और बाढ़ से बेघर हुए लोगों के लिए खाने-पीने और रहने की व्यवस्था कर रही है।

प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सदन को बताया कि स्थानीय और प्रांतीय अधिकारी बिजली, पानी की आपूर्ति और सड़क संपर्क बहाल करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए।

इसी तरह, अब तक गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनहुं से 38 शव बरामद किए गए हैं।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश


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