प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए वैश्विक व्यवस्था बनाने पर जोर दिया

प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए वैश्विक व्यवस्था बनाने पर जोर दिया

प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए वैश्विक व्यवस्था बनाने पर जोर दिया
Modified Date: June 17, 2026 / 05:09 pm IST
Published Date: June 17, 2026 5:09 pm IST

(फोटो के साथ)

एवियॉन, 17 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कनेक्टिविटी और व्यापार में सहयोग बढ़ाने के लिए ‘जी-7’, भारत और ‘ग्लोबल साउथ’ देशों की क्षमताओं का इस्तेमाल करके एक वैश्विक व्यवस्था बनाने का बुधवार को सुझाव दिया।

उन्होंने फ्रांस के एवियॉन शहर में जी-7 शिखर सम्मेलन के एक सत्र के दौरान ‘इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड’ (इम्पैक्ट) नामक नयी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा।

मोदी ने कहा कि इस नयी व्यवस्था को महत्वाकांक्षी भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की तर्ज पर बनाया जा सकता है।

उन्होंने पूछा, “आईएमईसी की तरह, क्या हम अफ्रीका, लातिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप के देशों के साथ कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं?”

प्रधानमंत्री ने कहा, “जी-7 की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ‘ग्लोबल साउथ’ देशों की भागीदारी के जरिये हम कनेक्टिविटी और व्यापार को तेज करने के लिए ‘इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड’ (इम्पैक्ट) की स्थापना पर भी विचार कर सकते हैं।”

मोदी ने ‘रिवाइविंग ए बैलेंस्ड, शेयर्ड एंड सस्टेनेबल ग्रोथ फॉर ऑल’ विषय पर आयोजित सत्र में यह बात कही।

उन्होंने कहा, “अच्छी बात है कि जी-7 के अध्यक्ष फ्रांस ने इस विषय को महत्व दिया है। आज की सच्चाई यह है कि जब विकास की बात होती है, तो सवाल सिर्फ सकल घरेलू उत्पाद या व्यापार के आंकड़ों का नहीं होना चाहिए। असली सवाल यह है कि विकास किसके लिए, किसके साथ और किस दिशा में है?”

आईएमईसी पहल को वर्ष 2023 में दिल्ली में हुए ‘जी20’ शिखर सम्मेलन के दौरान अंतिम रूप दिया गया था। इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है, जिसमें सऊदी अरब, भारत, अमेरिका और यूरोप के बीच बड़े सड़क, रेल व समुद्री नेटवर्क बनाने की योजना है, ताकि एशिया, पश्चिम एशिया और पश्चिम के बीच एकीकरण सुनिश्चित किया जा सके।

पश्चिम एशिया में संकट के कारण यह परियोजना अभी शुरू नहीं हो सकी है।

अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने ‘ग्लोबल साउथ’ देशों की ताकतों के बारे में भी विस्तार से बताया।

उन्होंने कहा, “आज कई समाज में लोग वृद्ध हो रहे हैं, जबकि भारत और ‘ग्लोबल साउथ’ के दूसरे देशों में युवा प्रतिभा, उद्यमिता और कौशल की भरमार है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “इस प्राकृतिक मेल-जोल का फायदा उठाने के लिए एक वैश्विक कौशल साझेदारी बनाई जानी चाहिए। इसमें सभी देश मिलकर लोगों के कौशल की पहचान करेंगे और भरोसेमंद कुशल कामगारों के एक देश से दूसरे देश में जाने को बढ़ावा देंगे।”

मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए फ्रांस पहुंचे, जिसमें भारत को अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया है।

‘जी-7’ दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का समूह है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। यूरोपीय संघ भी इस समूह का सदस्य है।

यह समूह अपने सदस्यों के लिए वैश्विक आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा एवं समन्वय करने का प्रमुख मंच है।

प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय स्लोवाकिया यात्रा पूरी करने के बाद फ्रांस के एवियॉन शहर पहुंचे।

भाषा जोहेब नेत्रपाल

नेत्रपाल

नेत्रपाल

नेत्रपाल


लेखक के बारे में