POK President Death News: ‘पीओके’ के राष्ट्रपति सुल्तान महमूद चौधरी का निधन.. पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने जाहिर किया दुःख, झूझ रहे थे इस समस्या से

POK President Sultan Mahmood Chaudhry Death News: पेशे से वकील और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपुल्स) के वरिष्ठ नेता चौधरी अगस्त 2021 में पीओके के 'राष्ट्रपति' चुने गए थे। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने चौधरी के निधन पर शोक व्यक्त किया। 

POK President Death News: ‘पीओके’ के राष्ट्रपति सुल्तान महमूद चौधरी का निधन.. पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने जाहिर किया दुःख, झूझ रहे थे इस समस्या से

POK President Sultan Mahmood Chaudhry Death News | Image- Wikipedia file

Modified Date: February 1, 2026 / 06:42 am IST
Published Date: February 1, 2026 6:15 am IST
HIGHLIGHTS
  • पाक अधिकृत कश्मीर के राष्ट्रपति का निधन
  • कैंसर से पीड़ित थे सुल्तान महमूद चौधरी
  • इस्लामाबाद के अस्पताल में थे दाखिल

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के ‘राष्ट्रपति’ और अनुभवी राजनीतिज्ञ सुल्तान महमूद चौधरी का शनिवार को निधन हो गया। (POK President Sultan Mahmood Chaudhry Death News) वह 71 साल के थे। महमूद लिवर कैंसर से पीड़ित थे और इस्लामाबाद के एक अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा था। पेशे से वकील और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपुल्स) के वरिष्ठ नेता चौधरी अगस्त 2021 में पीओके के ‘राष्ट्रपति’ चुने गए थे। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने चौधरी के निधन पर शोक व्यक्त किया।

‘पाकिस्तान दे रहा सक्रिय आतंकवादी संगठनों को समर्थन’ : विदेशी रिपोर्ट

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी समाज, मीडिया और सरकारें अब भी “जिहादी आतंकवाद” को लेकर दूरदर्शिता की कमी दिखा रही हैं और पाकिस्तान समेत अन्य क्षेत्रों में इसकी गहराई, विचारधारा, प्रेरणाओं और बदलती रणनीतियों को समझने या प्रभावी ढंग से उससे निपटने में विफल रही हैं। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए पाकिस्तान अपने क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को समर्थन दे रहा है, जो क्षेत्रीय विस्तारवाद, जातीय सफाए और व्यापक क्षेत्रीय इस्लामीकरण में संलिप्त हैं।

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘पीजे मीडिया’ के लिए लिखते हुए तुर्की की पत्रकार उज़ाय बुलुत ने कहा, “कई पश्चिमी लोग जिहादी आतंकवाद को केवल विदेश नीति से जुड़ी शिकायतों या अलग-थलग घटनाओं के नजरिए से देखते हैं, न कि एक वैचारिक और धार्मिक रूप से प्रेरित परिघटना के रूप में। इसके कारण आतंकवाद-रोधी रणनीतियां कमजोर पड़ जाती हैं और कहीं न कहीं पाकिस्तान जैसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को अप्रत्यक्ष समर्थन भी मिल सकता है। यह संकीर्ण दृष्टि तब तक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाती रहेगी, जब तक जिहादी आतंकवाद और उसके समर्थकों के प्रति पश्चिमी विदेश नीति में मूलभूत बदलाव नहीं होता।”

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘पीजे मीडिया’ के लिए लिखते हुए तुर्की की पत्रकार उज़ाय बुलुत ने कहा, “कई पश्चिमी लोग जिहादी आतंकवाद को केवल विदेश नीति से जुड़ी शिकायतों या अलग-थलग घटनाओं के नजरिए से देखते हैं, न कि एक वैचारिक और धार्मिक रूप से प्रेरित परिघटना के रूप में। इसके कारण आतंकवाद-रोधी रणनीतियां कमजोर पड़ जाती हैं और कहीं न कहीं पाकिस्तान जैसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को अप्रत्यक्ष समर्थन भी मिल सकता है। यह संकीर्ण दृष्टि तब तक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाती रहेगी, जब तक जिहादी आतंकवाद और उसके समर्थकों के प्रति पश्चिमी विदेश नीति में मूलभूत बदलाव नहीं होता।”

‘कर्ज मांगन अपमानजनक’ : शाहबाज शरीफ, पाक पीएम

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ”मित्र देशों” से वित्तीय सहायता मांगने में अपमानजनक स्थिति का जिक्र करते हुए इस बात को खुलकर स्वीकारा कि विदेशी ऋण लेने की मजबूरी में पाकिस्तान को अपना सिर झुकाना पड़ा है और ”आत्मसम्मान की कीमत पर” समझौता करना पड़ा।

इस्लामाबाद में शुक्रवार को देश के प्रख्यात व्यापारियों और निर्यातकों के सम्मान में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए शरीफ ने उस कठिन दौर को याद किया जब पाकिस्तान को दिवालियापन के डर का सामना करना पड़ा था और कुछ लोग इसे (पाकिस्तान को) तकनीकी रूप से विफल होने के कगार पर बता रहे थे।

उन्होंने कहा, ”जब हमने पदभार संभाला, तब आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक थी और आम आदमी को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।” प्रधानमंत्री ने 2023 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रबंध निदेशक के साथ अपनी मुलाकात का जिक्र किया जिसके बाद वैश्विक ऋणदाता ने एक आर्थिक कार्यक्रम को मंजूरी दी जिससे देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद मिली।

शरीफ ने कहा कि मित्र देशों ने मुश्किल समय में पाकिस्तान का पूरा समर्थन किया है और उन्होंने सेना प्रमुख एवं रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ मिलकर कई देशों के नेताओं से अरबों डॉलर के ऋण मांगने के लिए मुलाकात की।

उन्होंने कहा, ”मैं कैसे बताऊं कि हमने मित्र देशों से ऋण के लिए किस तरह अनुरोध किया? मित्र देशों ने हमें निराश नहीं किया। लेकिन जो ऋण मांगने जाता है, उसका सिर झुका रहता है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि ऋण से दायित्व भी उत्पन्न होते हैं जिन्हें पूरा करना होता है।

उन्होंने कहा, ”जब आप ऋण लेने जाते हैं तो आपको अपने आत्मसम्मान की कीमत चुकानी पड़ती है। आपको समझौता करना पड़ता है… कभी-कभी, अनुचित मांगें सामने आ सकती हैं और आपको उन्हें पूरा करना पड़ सकता है, भले ही उन्हें पूरा करने का कोई कारण न हो।”

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A journey of 10 years of extraordinary journalism.. a struggling experience, opportunity to work with big names like Dainik Bhaskar and Navbharat, priority given to public concerns, currently with IBC24 Raipur for three years, future journey unknown