पोप और कैंटरबरी की आर्चबिशप की ऐतिहासिक मुलाकात, संवाद जारी रखने का संकल्प

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पोप और कैंटरबरी की आर्चबिशप की ऐतिहासिक मुलाकात, संवाद जारी रखने का संकल्प

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  • Publish Date - April 27, 2026 / 05:36 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 05:36 PM IST

वेटिकन सिटी, 27 अप्रैल (एपी) पोप लियो चौदहवें ने सोमवार को वेटिकन में कैंटरबरी की आर्कबिशप सारा मुलाली के साथ प्रार्थना की और यह संकल्प जताया कि मतभेद “चाहे कितने ही जटिल क्यों न हों”, उन्हें दूर करने के प्रयास जारी रहेंगे।

यह मुलाकात ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि सारा मुलाली चर्च ऑफ इंग्लैंड की पहली महिला प्रमुख और वैश्विक एंग्लिकन कम्यूनियन की आध्यात्मिक नेता हैं।

ईसाई धर्म के इन दो प्रमुख धार्मिक नेताओं के बीच यह मुलाकात कुछ वर्ष पहले तक अकल्पनीय मानी जाती थी, खासकर महिलाओं के शीर्ष पद पर अभिषेक और मुलाली की नियुक्ति को लेकर दोनों चर्चों के बीच मतभेदों के कारण।

पोप ने स्वीकार किया कि दोनों चर्चों के संबंधों में “नए मुद्दे” जुड़ गए हैं, जो पहले से मौजूद ऐतिहासिक मतभेदों के साथ जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद उन्होंने पूर्व पोप परंपरा को जारी रखते हुए चर्चों के एकीकरण के प्रयास जारी रखने का वादा किया।

एंग्लिकन चर्च 1534 में हेनरी अष्टम के समय रोम से अलग हो गया था, जब उनके विवाह को निरस्त करने से इनकार कर दिया गया था। 1960 के दशक से औपचारिक धर्मशास्त्रीय संवाद शुरू होने के बावजूद, महिलाओं को पादरी बनाने जैसे मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। रोमन कैथोलिक चर्च में यह पद केवल पुरुषों के लिए आरक्षित है।

लियो ने पोप फ्रांसिस का हवाला देते हुए कहा कि यदि मतभेदों के कारण वे अपने साझा उद्देश्य, ‘मसीह का संदेश फैलाने’ को पूरा नहीं करते, तो यह ‘गलत’ होगा।

उन्होंने कहा, “मेरी ओर से मैं जोड़ना चाहूंगा कि यदि हम अपने मतभेदों को दूर करने के लिए प्रयास जारी नहीं रखते, तो यह भी गलत होगा, चाहे वे कितने ही कठिन क्यों न हों।”

मुलाली की नियुक्ति से पहले से विभाजित एंग्लिकन समुदाय में और मतभेद उभरे हैं। वह पिछले महीने पदभार संभालने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर वेटिकन पहुंचीं। उन्होंने स्वागत के लिए पोप का आभार जताया।

दोनों धर्मगुरुओं ने पोप के पुस्तकालय में मुलाकात के बाद एपोस्टोलिक पैलेस के अर्बन आठवें चैपल में संयुक्त प्रार्थना की। वेटिकन के अनुसार यह “प्रार्थना का विशेष क्षण” था।

मुलाली ने अपने संबोधन में कहा, “अमानवीय हिंसा, गहरे विभाजन और तेज सामाजिक बदलाव के बीच हमें एक आशा से भरी कहानी सुनानी होगी—कि हर मानव जीवन अनमोल है और हम सभी ईश्वर की संतान हैं। हमें साझा भलाई के लिए हमेशा पुल बनाते हुए मिलकर काम करना चाहिए, न कि दीवारें बनाना चाहिए।”

एपी मनीषा माधव

माधव