ईरान के हमलों के बारे में पहले से सूचना न दिए जाने से कुछ खाड़ी देश निराश: सूत्र

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ईरान के हमलों के बारे में पहले से सूचना न दिए जाने से कुछ खाड़ी देश निराश: सूत्र

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  • Publish Date - March 6, 2026 / 09:23 AM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 09:23 AM IST

काहिरा, छह मार्च (भाषा) फारस की खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी इस बात से नाखुश हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमले करने से पहले उन्हें सूचित नहीं किया और उन्हें ईरान के जवाबी हमलों का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त समय और मदद नहीं दी गई।

अमेरिका और इजराइल द्वारा संयुक्त रूप से किए गए हमलों के बाद ईरान ने कई खाड़ी देशों में ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं।

दो खाड़ी देशों के अधिकारियों ने कहा कि उनकी सरकारें युद्ध को लेकर अमेरिका के रवैये से निराश हैं, खासकर पिछले शनिवार को ईरान पर किए गए शुरुआती हमले के तरीके को लेकर वे नाखुश हैं।

उन्होंने कहा कि उनके देशों को अमेरिका-इजराइल के हमले की पहले से सूचना नहीं दी गई। उन्होंने शिकायत की कि अमेरिका ने उनकी इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया कि इस युद्ध के नतीजे पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी होंगे।

एक अधिकारी ने कहा कि खाड़ी देश इस बात से निराश और यहां तक कि नाराज भी हैं कि अमेरिकी सेना ने उनकी पर्याप्त रक्षा नहीं की है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में यह धारणा है कि यह अभियान इजराइल और अमेरिकी सैनिकों की रक्षा पर केंद्रित रहा, जबकि खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा खुद करने के लिए छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि उनके देश में ड्रोन और मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले रोकने वाले अवरोधकों का भंडार ‘‘तेजी से खत्म हो रहा है।’’

खाड़ी देशों के इन अधिकारियों ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी।

सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन की सरकारों ने इस मामले में टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया।

अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ की प्रवक्ता एना केली ने कहा, ‘‘ईरान के जवाबी बैलिस्टिक मिसाइल हमले 90 प्रतिशत तक कम हो गए हैं क्योंकि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ उसकी इन हथियारों को दागने या और अधिक हथियार बनाने की क्षमता को कुचल रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप हमारे सभी क्षेत्रीय साझेदारों के निकट संपर्क में हैं और आतंकवादी ईरानी शासन के अपने पड़ोसियों पर हमले इस बात को साबित करते हैं कि हमारे देश और हमारे सहयोगियों के खिलाफ इस खतरे को खत्म करना राष्ट्रपति ट्रंप के लिए कितना जरूरी था।’’

इस मामले में अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय ‘पेंटागन’ ने कोई टिप्पणी नहीं की।

इस संबंध में खाड़ी के अरब देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं धीमी रही हैं, लेकिन उनकी सरकारों से करीबी संबंध रखने वाली सार्वजनिक हस्तियों ने अमेरिका की खुलकर आलोचना की है और उनका कहना है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक अनावश्यक युद्ध में धकेल दिया।

पूर्व सऊदी खुफिया प्रमुख प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने बुधवार को ‘सीएनएन’ से कहा, ‘‘यह नेतन्याहू का युद्ध है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने राष्ट्रपति (ट्रंप) को अपने विचारों का समर्थन करने के लिए किसी तरह राजी कर लिया।’’

ईरान ने खुद पर हमले के बाद खाड़ी देशों में हमले किए हैं। ये देश ईरान की कम दूरी की मिसाइलों की मारक क्षमता के भीतर हैं। इनके कारण दुनिया में तेल की आपूर्ति का प्रवाह बाधित हो रहा है।

आधिकारिक बयानों के आधार पर एपी (एसोसिएटेड प्रेस) के आकलन के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने पांच खाड़ी देशों को निशाना बनाकर कम से कम 380 मिसाइल और 1,480 से अधिक ड्रोन दागे हैं और इन देशों में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं।

एपी सिम्मी वैभव

वैभव