Taliban New Criminal Code: ‘पत्नी को पीट सकता है पति…बिना पूछे नहीं जा सकती रिश्तेदारों के घर’ नए कानून को मिली मंजूरी, शामिल किए गए इस्लामी धर्मग्रंथों की शर्तें

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Taliban New Criminal Code: 'पत्नी को पीट सकता है पति...बिना पूछे नहीं जा सकती रिश्तेदारों के घर' नए कानून को मिली मंजूरी, शामिल किए गए इस्लामी धर्मग्रंथों की शर्तें

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  • Publish Date - February 18, 2026 / 02:29 PM IST,
    Updated On - February 18, 2026 / 02:37 PM IST

Taliban New Criminal Code: 'पत्नी को पीट सकता है पति...बिना पूछे नहीं सकती रिश्तेदारों के घर' नए कानून को मिली मंजूरी, शामिल किए गए इस्लामी धर्मग्रंथों की शर्तें / Image; Symbolic

HIGHLIGHTS
  • पत्नी या दासी को 'सजा' के तौर पर पीटने का कानूनी अधिकार
  • सजा तय करने का अधिकार इस्लामी मौलवियों को दे दिया गया
  • महिला अपने पति की अनुमति के बिना अपने ही रिश्तेदारों से मिलने जाती

काबुल: Taliban New Criminal Code जहां एक ओर पुरी दुनिया महिला शसक्तिकरण की बात कर रही है और अलग-अलग देशों में महिलाओं के हित की रक्षा करने के लिए कई नए प्रयोग किए जा रहे हैं तो दूसरी ओर अफगानिस्तान ने महिलाओं को लेकर ऐसा कानून पास किया है जो ह्यूमन राइट्स वालों की चिंता का विषय बन गया है। दरअसल तालिबान की सरकार ने महिलाओं की आजादी पर लगाम लगाते हुए नया क्रिमिनल कोड लागू किया है, जिसके तहत पतियों को अपनी पत्नियों को पीटने की छूट दी गई है। बताया जा रहा है कि इस कानून को सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा की अभी अनुमति मिल गई है।

नए क्रिमिनल कोड को मिली मंजूरी

Taliban New Criminal Code मिली जानकारी के अनुसार सरकार की ओर से पेश किए गए 90 पेज के नए क्रिमिनल कोड में इस्लामी धर्मग्रंथों की पुरानी शर्तों को शामिल किया गया है। इस कानून के लागू होने के बाद ऊपर बैठे धार्मिक नेताओं को क्रिमिनल केस से लगभग छूट मिल जाती है और मजदूर वर्ग के लोगों के लिए सबसे कड़ी सजा तय हो जाती है। इस कानून के अनुसार महिलाओं को दास के बराबर मना गया है।

पति या मालिक पीट सकता है महिला को

इस कानून की शर्तों की बात करें तो ‘पति या मालिक अपनी पत्नी या दासी को सजा दे सकता है। वहीं, ये भी कहा गया है कि पति की इजाजत के बिना रिश्तेदारों से मिलने जाने वाली महिलाओं को तीन महीने की जेल की सजा दी जाएगी। कानून में कहा गया है कि गंभीर अपराधों के लिए शारीरिक सजा सुधार सेवाएं नहीं, बल्कि इस्लामी मौलवी देंगे। इसके साथ ही कम गंभीर अपराधों में पति अपराधी पत्नी को पीट के सजा दे सकता है।

पति को 15 दिन की सजा

यह कानून उन महिलाओं को न्याय दिलाने का रास्ता तो देता है जिन पर हमला होता है, लेकिन उन्हें जज को अपने घाव दिखाकर यह साबित करना होता है कि उन्हें गंभीर शारीरिक नुकसान हुआ है और साथ ही उन्हें पूरी तरह से ढका रहना होता है। इतना ही नहीं, नए कोड के तहत अगर कोई अफगान महिला सभी कानूनी और सामाजिक मुश्किलों को पार करके यह साबित कर देती है कि उसके पति ने उस पर गंभीर हमला किया है तो भी पति को ज्यादा से ज्यादा 15 दिन की सजा दी जाएगी।

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क्या इस कानून के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई कार्रवाई हो रही है?

संयुक्त राष्ट्र (UN) और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है, लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान की संप्रभुता के कारण वहां के आंतरिक कानूनों को बदलना फिलहाल मुश्किल बना हुआ है।

नए कोड में महिलाओं की स्थिति क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कानून महिलाओं को एक स्वतंत्र नागरिक के बजाय 'संपत्ति' या 'दास' के समान मानता है, जहाँ उनके जीवन के हर फैसले पर पुरुष का नियंत्रण है।

क्या अफगानिस्तान की सभी महिलाओं पर यह लागू होगा?

हाँ, यह नया क्रिमिनल कोड पूरे अफगानिस्तान में प्रभावी हो गया है और इसका उल्लंघन करने वाली महिलाओं को जेल या सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने जैसी सजा दी जा सकती है।

सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा कौन है?

वह तालिबान का सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता है, जिसके आदेश को पत्थर की लकीर माना जाता है। वह सार्वजनिक रूप से बहुत कम दिखाई देता है लेकिन सभी बड़े कानून वही बनाता है।

क्या इस कानून में न्याय मिलने की कोई गुंजाइश है?

कानून कागजों पर न्याय की बात तो करता है, लेकिन गवाहों की कमी और जजों के पक्षपाती रवैये के कारण महिलाओं के लिए इसे साबित करना नामुमकिन जैसा है।