क्वाड की असली परीक्षा उन उद्देश्यों को पूरा करना है जिसके लिए इसका गठन किया गया है:विशेषज्ञ

क्वाड की असली परीक्षा उन उद्देश्यों को पूरा करना है जिसके लिए इसका गठन किया गया है:विशेषज्ञ

क्वाड की असली परीक्षा उन उद्देश्यों को पूरा करना है जिसके लिए इसका गठन किया गया है:विशेषज्ञ
Modified Date: May 29, 2026 / 11:21 am IST
Published Date: May 29, 2026 11:21 am IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, 29 मई (भाषा) भारत की ओर से हाल में आयोजित क्वाड (चतुष्पक्षीय संवाद) विदेश मंत्रियों की बैठक का उल्लेख करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि क्वाड की असली परीक्षा उन उद्देश्यों को पूरा करना है, जिनके लिए इसका गठन किया गया है।

‘सामरिक और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र’ (सीएसआईएस) द्वारा आयोजित एक पैनल चर्चा में भाग लेते हुए, विदेश नीति विशेषज्ञ तन्वी मदान ने कहा कि पिछले वर्ष जुलाई में हुई बैठक में क्वाड के विदेश मंत्रियों ने चार अलग-अलग मुद्दों की पहचान की थी। ये मुद्दे समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, प्रौद्योगिकी सुरक्षा तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत हैं।

ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन के ‘सेंटर फॉर एशिया पॉलिसी स्टडीज’ की सीनियर फेलो मदान ने कहा, ‘‘ इस शिखर सम्मेलन में आपने जो देखा, वह कुछ प्रगति थी। हो सकता है कि वह बहुत बड़े या क्रांतिकारी फैसलों जैसी न हो, लेकिन उदाहरण के तौर पर यदि आप समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यों को देखें और उन्हें समग्र रूप से जोड़ें, तो उन्होंने समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर अधिक ठोस और विशिष्ट तरीके से महत्वपूर्ण प्रगति की है

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भाग लिया।

‘‘क्वाड का सम्मेलन: प्राथमिकताएं, साझेदारियां और हिंद-प्रशांत क्षेत्र’’ शीर्षक वाली इस पैनल चर्चा का संचालन बृहस्पतिवार को सीएसआईएस में भारत और उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के मामलों के वरिष्ठ सलाहकार एवं अध्यक्ष रिक रोसो ने किया।

‘द एशिया ग्रुप’ के प्रमुख ल्यूक कॉलिन ने, ‘‘ मेरा मानना है कि सभी चार देशों ने यह समझ लिया है कि उन्हें अपने महत्वपूर्ण खनिजों के भविष्य को सुरक्षित करने और उस मूलभूत कमजोरी को कम करने के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लानी होगी तथा अलग-अलग आपूर्ति श्रृंखलाएं स्थापित करनी होंगी।’’

कॉलिन ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों को मंत्रिस्तरीय बैठक में इतना प्रमुख स्थान दिया जाना इस बात को दर्शाता है कि यह मुद्दा कितना महत्वपूर्ण है और सभी देश इस पर एकमत हैं कि आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाई जाए।

ऑस्ट्रेलियाई सामरिक नीति संस्थान के वरिष्ठ फेलो निशांक मोटवानी ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के लिए सरकारों द्वारा दीर्घकालिक निवेश, पूंजी और चीन द्वारा मूल्य हेरफेर से सुरक्षा की आवश्यकता होगी।

मोटवानी ने वर्ष 2010 में सेनकाकू द्वीपों को लेकर चीन के साथ हुए विवाद के बाद ऑस्ट्रेलिया के महत्वपूर्ण खनिज उद्योग को समर्थन देने के लिए जापान के आगे आने का उदाहरण दिया।

मदान ने कहा कि क्वाड समूह तब तक बना रहेगा, जब तक सभी चार देश साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार और इच्छुक रहेंगे।

‘पॉप-कल्चर एनालॉगी’ का उदाहरण देते हुए मदान ने क्वाड की तुलना “निंजा टर्टल्स” से न करके मार्वल कॉमिक्स की “एवेंजर्स” फ्रैंचाइज़ी से की।

उन्होंने कहा, “यह निंजा टर्टल्स जैसा नहीं है। हर कोई एक जैसा नहीं दिखता और न ही सब कुछ साथ मिलकर करता है। यह एवेंजर्स जैसा है। हर देश अपने-अपने तरीके से काम करेगा, अपनी अलग विशेषताएं और अपने कारण होंगे, वे एक-दूसरे के साथ मिलकर भी अपने-अपने कार्य करेंगे, और जब किसी मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी तो आपस में समन्वय करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि क्वाड द्वारा किए जाने वाले सभी कार्य दो मुख्य उद्देश्यों के अनुरूप होने चाहिए – देश और क्षेत्र के लिए लचीलापन बढ़ाना और सत्ता का एक स्थिर संतुलन स्थापित करने में मदद करना।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा


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