‘ब्लैक होल’ की प्लाज्मा किरणों को अपने साथ ‘नचाती’ है साथी तारे की हवा

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‘ब्लैक होल’ की प्लाज्मा किरणों को अपने साथ ‘नचाती’ है साथी तारे की हवा

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  • Publish Date - April 20, 2026 / 06:06 PM IST,
    Updated On - April 20, 2026 / 06:06 PM IST

(स्टीव प्रबु और जेम्स मिलर-जोन्स, कर्टिन विश्वविद्यालय)

पर्थ, 20 अप्रैल (द कन्वरसेशन) ब्रह्मांड के सबसे ज्यादा गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्र ‘ब्लैक होल’ लगभग प्रकाश की गति से पदार्थ को बाहर की ओर प्रक्षेपित कर सकते हैं, जो शक्तिशाली प्लाज्मा किरणों के रूप में होते हैं जिन्हें जेट कहा जाता है।

माना जाता है कि ये जेट ब्रह्मांड की सबसे ऊर्जावान घटनाओं में से एक हैं। आज ‘नेचर एस्ट्रोनॉमी’ में प्रकाशित हमारा नया शोध इस धारणा को चुनौती देता है।

हमने पाया कि किसी तारे से आने वाली हवा जैसी साधारण चीज भी इन ताकतवर जेट्स के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है और कभी-कभी उनके बराबर ताकत दिखा सकती है।

ब्रह्मांड का नृत्य

सिग्नस एक्स-1 प्रणाली एक ब्लैक होल और एक विशाल तारे के बीच का एक ब्रह्मांड नृत्य है। यह अब तक खोजा गया पहला ‘ब्लैक होल’ है। इसका द्रव्यमान हमारे सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 21 गुना है, जो लगभग 100 किलोमीटर के क्षेत्र में संकुचित है। यह एक द्विआधारी प्रणाली में है जिसमें एक बहुत बड़ा सहोदर तारा है जिसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 40 गुना है।

ब्लैक होल और तारा अपनी कक्षा में एक दूसरे के चारों ओर हर 5.6 दिन में एक बार चक्कर लगाते हैं।

लगभग 20,000 वर्षों से ‘ब्लैक होल’ इस तारे से पदार्थ ग्रहण कर रहा है। यह तारे की शक्तिशाली पवन को अपने तीव्र गुरुत्वाकर्षण बल का उपयोग करके ग्रहण करता है।

इस पदार्थ का कुछ हिस्सा ब्लैक होल में समा जाता है, और एकतरफा यात्रा में उस बिंदु (इवेंट होराइजन) को पार कर जाता है जहां से वापसी संभव नहीं है। गैस के साथ खींचे गए घूमते हुए चुंबकीय क्षेत्र इन जेट को उत्पन्न करते हैं, जो लगभग प्रकाश की गति से चलते हैं।

इवेंट होराइजन वह काल्पनिक सीमा है जो ब्लैक होल के चारों ओर होती है। इसके अंदर गुरुत्वाकर्षण इतना ज़्यादा होता है कि कुछ भी, यहां तक कि प्रकाश भी, बाहर नहीं निकल सकता।

ये जेट ब्लैक होल के निकट से ऊर्जा को एक हजार अरब गुना अधिक दूरी तक, यानी 16 प्रकाश वर्ष दूर तक ले जाते हैं।

पिछले 20,000 वर्षों में इनकी क्रिया ने आसपास के अंतरतारकीय अंतरिक्ष में गर्म गैस के एक विशाल बुलबुले को और फुला दिया है। लेकिन इनके महत्व के बावजूद, इन जेटों की तात्कालिक शक्ति को मापना अब तक एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

शक्तिशाली युग्म

तारे से उत्पन्न हवाएं प्रकाश के बाह्य दबाव द्वारा तारे की सतह से निकलने वाले कणों की धाराएं होती हैं। जब हमारे सूर्य से निकलने वाली सौर पवन विशेष रूप से तीव्र होती है, तो ये कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने पर ‘अरोरा’ उत्पन्न करते हैं।

अरोरा का मुख्य मतलब पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों (उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव) के ऊपरी वायुमंडल में रात के समय दिखाई देने वाली प्राकृतिक और रंगीन प्रकाश घटना से है। यह सूर्य के आवेशित कणों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के बीच टकराव से बनती है।

सिग्नस एक्स-1 में सहोदर तारा इतना विशाल और इतना चमकीला है कि यह अपनी पवन में सूर्य की तुलना में 10 करोड़ गुना अधिक द्रव्यमान खो देता है और उसे तीन गुना अधिक गति से प्रक्षेपित करता है।

हमारे अध्ययन में, हमने हजारों किलोमीटर के अंतर पर स्थित दूरबीनों के जरिये इन पवन धाराओं की अत्यंत उच्च-रिजॉल्यूशन वाली छवियां प्राप्त कीं। यही तकनीक ‘इवेंट होराइजन टेलीस्कोप’ द्वारा ब्लैक होल की पहली छवि बनाने के लिए भी उपयोग की गई थी।

हमने पाया कि सिग्नस एक्स-1 में सहोदर तारे से निकलने वाली पवन इतनी शक्तिशाली है कि यह ‘ब्लैक होल’ द्वारा प्रक्षेपित जेट को मोड़ सकती है। यह दर्शाता है कि विशाल तारों की हवाएं कितनी शक्तिशाली हो सकती हैं।

जैसे-जैसे ब्लैक होल तारे की परिक्रमा करता है, हवाएं लगातार जेट पर दबाव डालती है, जिससे वे तारे से दूर चली जाती हैं। इससे उनकी दिशा बदल जाती है, ठीक वैसे ही जैसे पृथ्वी पर हवा फव्वारे के पानी को इधर-उधर घुमा सकती है।

हमारे दृष्टिकोण से, ये जेट ब्रह्मांडीय तंत्र की कक्षीय गति के साथ तालमेल बिठाते हुए ‘नृत्य’ करते प्रतीत होते हैं। इस ब्रह्मांडीय ‘नृत्य’ का मॉडल बनाकर, हम पहली बार जेट की तात्कालिक शक्ति को मापने में सक्षम हुए और पाया कि यह 10,000 सूर्य के बराबर है।

ब्लैक होल के ‘आहार’ में कैलोरी की कमी

‘ब्लैक होल’ अपनी ऊर्जा का उपयोग कैसे करते हैं, यह समझने से हमें आकाशगंगाओं के विकास के बारे में पता चलता है।

जब पदार्थ ‘ब्लैक होल’ की ओर गिरता है, तो उसका कुछ हिस्सा ब्लैक होल के विकास में योगदान देता है। लेकिन एक महत्वपूर्ण हिस्सा जेट में परिवर्तित हो सकता है, जो अपने परिवेश में ऊर्जा वापस प्रवाहित करते हैं।

आकाशगंगाओं के केंद्रों में स्थित सबसे विशाल ब्लैक होल के लिए, जेट उनकी मेजबान आकाशगंगाओं को आकार दे सकते हैं और इससे भी बड़ी ब्रह्मांडीय संरचनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

हम अंदर की ओर गिरने वाले पदार्थ द्वारा उत्पन्न एक्स-रे से यह माप सकते हैं कि ब्लैक होल कितनी तेजी से ऊर्जा ग्रहण कर रहा है। हालांकि, अब तक हमारे पास किसी भी क्षण इन जेट में कितनी ऊर्जा प्रवाहित होती है, इसे सीधे मापने का कोई तरीका नहीं था।

सिग्नस एक्स-1 में जेट शक्ति के हमारे मापन से ब्लैक होल के ‘ऊर्जा बजट को संतुलित करने’ का एक नया तरीका मिलता है।

‘ब्लैक होल’ के ऊर्जा ग्रहण करने की गति और जेट के जरिये ले जाये जाने वाली ऊर्जा की मात्रा की तुलना करके, हम ब्रह्मांड के कंप्यूटर सिमुलेशन को और बेहतर बना सकते हैं।

इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि ‘ब्लैक होल’ ब्रह्मांड को सर्वाधिक बड़े पैमाने पर कैसे प्रभावित करते हैं।

‘ब्लैक होल’ और विशाल तारे का यह ब्रह्मांड नृत्य मात्र एक मुड़े हुए जेट को ही नहीं दर्शाता, बल्कि यह दिखाता है कि परिवेश कैसे जेट जैसी सबसे ऊर्जावान घटनाओं को भी आकार देता है।

सिग्नस एक्स-1 में नृत्य करते इन जेट को देखकर, हमने यह बेहतर ढंग से समझा है कि ब्लैक होल ब्रह्मांड के विकास को कैसे प्रभावित करते हैं।

(द कन्वरसेशन) संतोष प्रशांत

प्रशांत