जायद फसलों की हल्की बढ़त के साथ 69.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई

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जायद फसलों की हल्की बढ़त के साथ 69.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई

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  • Publish Date - April 20, 2026 / 07:42 PM IST,
    Updated On - April 20, 2026 / 07:42 PM IST

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) देश में ग्रीष्मकालीन यानी जायद फसलों का रकबा इस साल अब तक हल्की बढ़त के साथ 69.06 लाख हेक्टेयर हो गया है, जिसमें सबसे अधिक क्षेत्र धान के तहत है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।

जायद फसलें फरवरी से जून महीने के बीच बोई जाती हैं। रबी (सर्दियों) की फसलों की कटाई और खरीफ (मानसून) फसलों की बुवाई के बीच के समय में जायद फसलों की खेती होती है।

पिछले साल इसी अवधि में 66.14 लाख हेक्टेयर में जायद फसलों की बुवाई हुई थी।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 17 अप्रैल तक धान की बुवाई 30.64 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 32.31 लाख हेक्टेयर थी।

जायद फसल सत्र में धान की खेती मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक और ओडिशा में की जाती है। इसके अलावा मूंग एवं उड़द जैसी जल्द तैयार होने वाली दालों और कुछ तिलहनों की खेती मध्य प्रदेश एवं राजस्थान जैसे राज्यों में होती है।

वहीं, दलहनों का रकबा बढ़कर 15.47 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 13.49 लाख हेक्टेयर था। तिलहनों का क्षेत्र भी बढ़कर 9.14 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया, जो पहले 7.65 लाख हेक्टेयर था।

इस दौरान मोटे अनाज का रकबा भी बढ़कर 13.81 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 12.70 लाख हेक्टेयर था।

सरकार किसानों को सर्दी एवं मानसून के बीच लगभग 90 दिन के अंतराल का बेहतर उपयोग करने के लिए जायद फसलों को बढ़ावा दे रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कुछ राज्यों में आवारा पशुओं की समस्या के समाधान से जायद फसलों का रकबा और बढ़ाया जा सकता है।

देश में कृषि फसलें मुख्य रूप से तीन सत्रों- रबी, खरीफ और जायद में उगाई जाती हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय