पार्लियामेंट में कबूल करने के बाद पलटा पाकिस्तान, विदेश मंत्रालय ने कहा- पायलट अभिनंदन की रिहाई के​ लिए पाक पर कोई ‘दबाव नहीं’ था

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पार्लियामेंट में कबूल करने के बाद पलटा पाकिस्तान, विदेश मंत्रालय ने कहा- पायलट अभिनंदन की रिहाई के​ लिए पाक पर कोई 'दबाव नहीं' था

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  • Publish Date - October 29, 2020 / 07:27 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:28 PM IST

इस्लामाबाद, 29 अक्टूबर (भाषा) पाकिस्तान ने दावा किया कि भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान की रिहाई के लिये देश पर कोई दबाव नहीं था । इससे एक दिन पहले विपक्ष के एक शीर्ष नेता ने कहा था कि विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने देश पर भारत के हमले के डर से उच्चस्तरीय बैठक में पायलट को रिहा किये जाने का अनुरोध किया था ।

पाकिस्तान की सेना ने 37 साल के भारतीय वायु सेना के पायलट को 27 फरवरी 2019 पकड़ लिया था । इससे पहले पाकिस्तान ने उनके ​मिग—21 बाइसन जेट विमान को मार गिराया था ।

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जम्मू कश्मीर के पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर हुये हमले का बदला लेने के लिये भारतीय वायु सेना के जेट विमानों ने 26 फरवरी 2019 को तड़के पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट में आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के शिविरों पर बमबारी की थी । पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गये थे ।

अभिनंदन ने मिग को गिराये जाने से पहले पाकिस्तान के एफ—16 लड़ाकू विमान को ​मार गिराया था । पाकिस्तान ने उन्हें एक मार्च की रात को रिहा कर दिया था ।

उस दिन के तनाव को याद करते हुये इस्लामाबाद में नेशनल असेंबली के पूर्व अध्यक्ष अयाज सादिक ने कहा, ”पैर कांप रहे थे, माथे पर पसीना था और विदेश मंत्री (कुरैशी) ने हमसे कहा, अल्लाह के लिये उन्हें (अभिनंदन) अब वापस जाने दो, क्योंकि भारत रात नौ बजे पाकिस्तान पर हमला करने ही वाला है ।”

उन्होंने कहा, ”भारत हमले की योजना नहीं बना रहा था…वे केवल इतना चाहते थे कि पाकिस्तान भारत के सामने झुक जाये और अभिनंदन को वापस भेजा जाये ।

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सादिक की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुये विदेश कार्यालय के प्रवक्ता जाहिद हफीज चौधरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई को लेकर पाकिस्तान पर कोई दबाव नहीं था ।

प्रवक्ता ने अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”पाकिस्तान सरकार ने यह ​निर्णय शांति के मद्देनजर लिया था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस फैसले का स्वागत किया था ।”

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