पोप की आलोचना के बाद ट्रंप ने ईरान युद्ध में समर्थन नहीं देने के लिए मेलोनी की कड़ी निंदा की

पोप की आलोचना के बाद ट्रंप ने ईरान युद्ध में समर्थन नहीं देने के लिए मेलोनी की कड़ी निंदा की

पोप की आलोचना के बाद ट्रंप ने ईरान युद्ध में समर्थन नहीं देने के लिए मेलोनी की कड़ी निंदा की
Modified Date: April 16, 2026 / 11:44 am IST
Published Date: April 16, 2026 11:44 am IST

मिलान/साओ पाओलो, 16 अप्रैल (एपी) पोप लियो 14वें का समर्थन करने के कारण इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर हैं जिन्हें कभी यूरोप और डोनाल्ड ट्रंप के बीच सेतु माना जाता था।

वहीं, ब्राजील के राष्ट्रपति लुईज इनासियो लूला डी सिल्वा ने भी पोप की आलोचना करने के लिए ट्रंप पर निशाना साधा है।

पोप लियो 14वें की आलोचना करने के बाद ट्रंप ने अपना गुस्सा मेलोनी पर निकाला जो लंबे समय से उनके सबसे करीबी यूरोपीय सहयोगियों में से एक रही हैं। मेलोनी ने पोप पर इस तीखे हमले को ‘‘अस्वीकार्य’’ बताया था और ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध का समर्थन नहीं किया था।

ट्रंप ने इटली के प्रमुख दैनिक अखबार ‘कोरिएरे डेला सेरा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘मुझे लगा था कि उनमें साहस है। मैं गलत था।’’ हालांकि मेलोनी ने ट्रंप के हमलों का सीधे तौर पर जवाब नहीं दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम मेलोनी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि पिछले महीने हुए जनमत संग्रह में मिली करारी हार से उबर रहीं इटली की प्रधानमंत्री ईरान के साथ हुए युद्ध के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रही हैं, जिसमें ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भी शामिल हैं।

जॉन हॉपकिंस एसएआईएस यूरोप की प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों के संस्थान की निदेशक नताली टॉकी ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। ट्रंप यूरोप और इटली समेत दुनिया के कई हिस्सों में बेहद बदनाम हो चुके हैं।’’

बुधवार को ट्रंप ने अपने रुख पर जोर देते हुए कहा कि उनके बीच संबंध खराब हो गए हैं। ‘फॉक्स न्यूज’ से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘‘उनका (मेलोनी का) रवैया नकारात्मक रहा है। जिसने भी ईरान के मामले में हमारी मदद करने से इनकार किया है, उनके साथ हमारे संबंध पहले जैसे नहीं रहे।’’

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित यूरोपीय संघ की एकमात्र नेता मेलोनी से यह उम्मीद की जा रही थी कि 15 महीने पहले सत्ता में लौटने के बाद वह उनके साथ अपने मजबूत संबंधों का लाभ उठाएंगी। दोनों नेताओं के बीच स्वाभाविक गठबंधन की संभावना थी, क्योंकि दोनों राष्ट्रवादी विचारधारा वाले और प्रवासन पर समान रूप से कठोर रुख रखते हैं।

लेकिन ट्रंप की शुल्क नीति का असर इटली पर भी पड़ा और कुछ लोग कह सकते हैं कि इस रिश्ते से उसे कुछ खास फायदा नहीं हुआ।

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस महीने दोनों की बातचीत हुई है तो ट्रंप ने ‘कोरिएरे’ को बताया, ‘‘नहीं, काफी समय से हमारी बातचीत नहीं हुई है।’’

एक साल पहले ‘ओवल ऑफिस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ में राष्ट्रपति का कार्यालय) में हुई उनकी मुलाकात असहज रही थी, जब उन्होंने शुल्क के मुद्दे पर ट्रंप का सीधे सामना करने से परहेज किया था। ईरान युद्ध को लेकर दोनों देशों के बीच दूरियां और बढ़ीं। मेलोनी ने कहा है कि इटली इस युद्ध में हिस्सा नहीं लेगा और पिछले महीने इटली ने सिसिली के एक महत्वपूर्ण हवाई अड्डे पर अमेरिकी बमवर्षकों को उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

इस सप्ताह मेलोनी ने पोप पर ट्रंप के हमले को ‘‘अस्वीकार्य’’ बताया था जो अमेरिकी राष्ट्रपति की अब तक की सबसे सीधी आलोचना थी।

वहीं, पोप और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जारी तीखी बयानबाजी के बीच ब्राजील के राष्ट्रपति ने बुधवार को कहा कि पोप लियो 14वें को उन ‘‘ताकतवर लोगों’’ से बचाया जाना चाहिए जिन्होंने हाल में उनकी आलोचना की है।

लियो 14वें अमेरिका से पहले पोप हैं। उन्होंने बुधवार को कैमरून की अपनी यात्रा के दौरान इस बात पर जोर दिया कि ‘‘आज दुनिया को जो संदेश सुनने की जरूरत है’’ वह शांति और संवाद का है।

हाल के दिनों में ट्रंप ने ईरान युद्ध के खिलाफ लियो की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की है।

अक्टूबर में दोबारा चुनाव लड़ने जा रहे वामपंथी विचारधारा वाले लूला (80) ने ब्राजील के राष्ट्रीय बिशप सम्मेलन की एक सभा को भेजे गए वीडियो संदेश में कहा, ‘‘मैं पोप लियो 14वें के प्रति एकजुटता दिखाना चाहता हूं। मानव इतिहास में, शांति और उत्पीड़न के शिकार लोगों के हिमायतियों पर ताकतवर एवं प्रभावशाली लोगों द्वारा हमले किए गए हैं जो खुद को पूजनीय देवता समझते हैं।’’

लूला ने कहा, ‘‘हथियार और धन के बल से कहीं अधिक प्रेम से भरा दिल बेहतर होता है।’’

लियो और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब पोप ने कहा कि ईश्वर उन लोगों को आशीर्वाद नहीं देते जो बम गिराते हैं। पोप ने ट्रंप द्वारा ईरानी सभ्यता को नष्ट करने की धमकी को ‘‘बिल्कुल अस्वीकार्य’’ बताया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने तर्क दिया कि लियो अपराध के मामले में कमजोर हैं और वामपंथियों के प्रभाव में हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी वजह से ही पोप को यह पद मिला है।

एपी सुरभि गोला

गोला


लेखक के बारे में