पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के हमले तेज, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संघर्ष और गहराया

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के हमले तेज, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संघर्ष और गहराया

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के हमले तेज, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संघर्ष और गहराया
Modified Date: July 18, 2026 / 10:35 am IST
Published Date: July 18, 2026 10:35 am IST

दुबई, 18 जुलाई (एपी) अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को भी बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले जारी रहे।

दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच संघर्ष लगातार तीव्र होता जा रहा है।

पिछले कई दिनों से दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। अंतरिम युद्धविराम टूटने के बाद, इस युद्ध के जल्द समाप्त होने के कोई संकेत नहीं हैं।

‘अमेरिकी सेंट्रल कमांड’ ने बताया कि उसने लगातार सातवीं रात ईरान के खिलाफ अभियान में उसकी सैन्य क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से हमले किए। शनिवार तड़के जारी बयान में कहा गया कि इन हमलों में निगरानी केंद्रों, सैन्य रसद ढांचे, भूमिगत हथियार भंडार और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया।

वहीं कुवैत ने दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को बीच में ही रोककर मार गिराया। बहरीन में भी हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए।

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हाल के अमेरिकी हमलों में दर्जनों लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने भी अपने कई और सैनिकों के घायल होने की पुष्टि की है।

ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से बाधित कर दी, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन सप्ताह के न्यूनतम स्तर पर आ गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए कहा,‘‘ ईरान में भी हम बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहे हैं और इसके नतीजे बहुत जल्द दुनिया के सामने होंगे।’’

युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी। अब ट्रंप पर युद्ध समाप्त करने और लंबे समय तक चलने वाले पश्चिम एशिया संघर्ष से बचने का घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है।

ईरान में पुलों और बिजली ढांचे पर हमले हुए है।

ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों में दक्षिणी होर्मोज़गान प्रांत के कई पुलों को निशाना बनाया गया।

माना जा रहा है कि इन हमलों का उद्देश्य बंदर अब्बास बंदरगाह को देश के मध्य भाग और राजधानी तेहरान से जोड़ने वाले सड़क एवं रेल संपर्क को बाधित करना है।

ईरान ने पहली बार स्वीकार किया कि अमेरिकी हमलों में उसके बिजली ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। ऊर्जा मंत्रालय ने दक्षिणी प्रांतों के लोगों से बिजली की बचत करने की अपील की, हालांकि यह नहीं बताया कि कौन-से प्रतिष्ठान प्रभावित हुए।

ईरानी अधिकारियों ने बताया कि हाल के अमेरिकी हमलों में 46 लोगों की मौत हुई है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं। शुक्रवार को एक पुल पर हुए हमले में आठ लोगों की जान गई।

उधर, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि सोमवार से अब तक 13 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें थलसेना के 10 और नौसेना के तीन जवान शामिल हैं। युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 14 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और 427 सैनिक घायल हो चुके हैं।

अमेरिकी हमलों में ओमान की खाड़ी स्थित ईरान के चाबहार बंदरगाह का एक प्रमुख निगरानी टॉवर भी ढह गया। इसकी पुष्टि ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए और बाद में अमेरिकी सेना ने भी की।

भारत के सहयोग से विकसित चाबहार बंदरगाह हाल के दिनों में अमेरिकी हमलों का निशाना रहा है।

ईरान का कहना है कि यह टॉवर बंदरगाह पर आने-जाने वाले व्यावसायिक जहाजों की निगरानी के लिए इस्तेमाल होता था, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि यह रिवोल्यूशनरी गार्ड के समुद्री निगरानी नेटवर्क का हिस्सा था, जिसका उपयोग होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जाता था।

एपी शोभना वैभव

वैभव


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