चीन के पास एफ-35 लड़ाकू विमान के कलपुर्जे पहुंचने के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने जांच शुरू की

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चीन के पास एफ-35 लड़ाकू विमान के कलपुर्जे पहुंचने के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने जांच शुरू की

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  • Publish Date - September 24, 2026 / 12:24 PM IST,
    Updated On - September 24, 2026 / 12:24 PM IST

वाशिंगटन, 24 सितंबर (एपी) अमेरिकी रक्षा विभाग इस बारे में जांच कर रहा है कि देश के सबसे उन्नत लड़ाकू विमान के कलपुर्जे हांगकांग कैसे पहुंचे जबकि एक मीडिया संस्थान ने बुधवार को अपनी खबर में कहा कि एफ-35 के उपकरण चीन को मिल चुके हैं।

एफ-35 संयुक्त कार्यक्रम से जुड़े कार्यालय ने एक बयान में कहा कि वह और रक्षा विभाग एफ-35 के कलपुर्जों के मामले में ‘‘एक खेप संबंधी मुद्दे’’ से अवगत हैं।

कार्यालय ने कहा, ‘‘हम इन कलपुर्जों को वापस हासिल करने, घटना की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय लागू करने के उद्देश्य से अमेरिकी अधिकारियों और उद्योग जगत के साझेदारों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।’’

वहीं, ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने मंगलवार को पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए स्वीकार किया कि विमान के कलपुर्जे हांगकांग पहुंच गए। हालांकि, उन्होंने इससे इनकार किया कि लापता कलपुर्जे ‘‘संवेदनशील उपकरण’’ थे।

ऑस्ट्रेलिया उन कई देशों में शामिल है, जिनकी सेनाएं इस एफ-35 लड़ाकू विमान का संचालन करती हैं।

मार्ल्स ने कहा, ‘‘हां, इसलिए हम निश्चित रूप से अमेरिका और उसकी प्रमुख कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ इस मामले में काम कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी समझ के अनुसार, इस बात को लेकर संतोष है और हम यहां किसी संवेदनशील उपकरण या संवेदनशील कलपुर्जे की बात नहीं कर रहे हैं। हालांकि, अंततः जो कुछ हुआ है, उससे जुड़े इस मुद्दे का प्रबंधन अमेरिका और लॉकहीड द्वारा ही किया जाएगा।’’

बुधवार को टिप्पणी के लिए ईमेल भेजे जाने पर लॉकहीड ने तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। बुधवार को ही चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग अमेरिका की राजकीय यात्रा पर वाशिंगटन पहुंचे।

चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसे इस घटना की जानकारी नहीं है, जबकि हांगकांग सरकार ने कहा कि वह विशिष्ट मामलों पर टिप्पणी नहीं करेगी।

सामाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने बुधवार को खबर दी कि चीन के पास एफ-35 के कलपुर्जे हैं, जिनमें कॉकपिट कैनोपी और हथियार कक्ष का दरवाजा शामिल हैं। ये कलपुर्जे कई महीने पहले ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका भेजे जाने के दौरान अप्रत्याशित रूप से हांगकांग की ओर मोड़ दिए गए थे। इन्हें या तो मरम्मत या नष्ट करने के लिए भेजा जा रहा था। यह स्पष्ट नहीं हो सका कि खेप का मार्ग कैसे बदला गया।

पॉलिटिको ने इससे पहले खबर दी थी कि इस मामले को लेकर अमेरिकी कांग्रेस ने जांच शुरू की, क्योंकि इस बात की चिंता थी कि चीन को अत्यधिक गोपनीय तकनीक के अहम कलपुर्जों तक पहुंच मिल सकती है।

ब्रिटिश शासन से 1997 में वापस मिलने के बाद से चीन ने हांगकांग पर कड़ा नियंत्रण बनाए रखा है। हांगकांग अपनी अलग सेना नहीं रख सकता और न ही अपनी स्वतंत्र कूटनीतिक गतिविधियां संचालित कर सकता है।

पहला ‘एफ-35 लाइटनिंग स्ट्राइक’ लड़ाकू विमान करीब 20 साल पहले टेक्सास की एक ‘असेंबली लाइन’ से बाहर आया था और इसे प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बड़ी छलांग के रूप में सराहा गया था। इसके बाद से स्टेल्थ प्रौद्योगिकी वाले इस तरह के 1,200 से अधिक विमान बनाए जा चुके हैं और 19 देशों ने इन विमानों के लिए ऑर्डर दिए हैं।

भाषा रंजन नेत्रपाल

नेत्रपाल