दुबई, 18 जुलाई (एपी) होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संघर्ष तेज होने के बीच अमेरिका और ईरान ने शनिवार को एक-दूसरे के बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए।
यह क्षेत्र पिछले कई दिनों से लगातार हमलों का सामना कर रहा है। यह संघर्ष अब तेजी से होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर केंद्रित होता जा रहा है। यह रणनीतिक जलमार्ग कभी दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के कच्चे तेल के परिवहन का प्रमुख मार्ग था।
अंतरिम युद्धविराम के टूट जाने के बाद अमेरिका और इजराइल द्वारा चार महीने से अधिक समय पहले शुरू किए गए इस युद्ध के समाप्त होने की फिलहाल कोई स्पष्ट संभावना नजर नहीं आ रही है।
‘अमेरिकी सेंट्रल कमांड’ ने बताया कि उसने लगातार सातवीं रात ईरान के खिलाफ अभियान में उसकी सैन्य ताकत को कमजोर करने के उद्देश्य से हमले किए। शनिवार तड़के जारी बयान में कहा गया कि इन हमलों में निगरानी केंद्रों, सैन्य साजोसामान, भूमिगत हथियार भंडार और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया।
शनिवार को सबसे अधिक नुकसान कुवैत में हुआ, जहां ईरान ने समुद्री जल को मीठा बनाने के एक संयंत्र और एक तेल प्रतिष्ठान पर हमला किया। कुवैत के अधिकारियों और कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने इसकी पुष्टि की, हालांकि दोनों ने इन प्रतिष्ठानों के स्थान का खुलासा नहीं किया।
इन हमलों में तेल प्रतिष्ठान पर कई लोग घायल हो गए, जबकि समुद्री जल को मीठा बनाने के एक संयंत्र में आग लग गई, जिसके कारण बिजली उत्पादन की कई इकाइयों को बंद करना पड़ा। रेगिस्तानी देश कुवैत में दो दिनों के भीतर समुद्री जल को मीठा बनाने वाले किसी संयंत्र पर यह दूसरा हमला है। कुवैत अपनी पेयजल आवश्यकता का लगभग 90 प्रतिशत समुद्री जल को मीठा बनाने से पूरा करता है।
कुवैत फायर फोर्स के अनुसार, ईरान के हमलों से दो अन्य स्थानों पर लगी आग पर काबू पाने की कोशिश में कई कर्मचारी घायल हो गए।
मिसाइल के खतरे के कारण कुवैत ने सुबह कुछ समय के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था और कुवैत एयरवेज ने कहा कि वह राजधानी आने-जाने वाली ज़्यादातर उड़ानों का समय बदल रही है।
इराक ने कहा कि उसने एरबिल शहर के ऊपर हमला करने वाले ड्रोन को मार गिराया है। जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘पेट्रा’ ने बताया कि देश की हवाई रक्षा प्रणाली ने ईरान की मिसाइलों को मार गिराया है, वहीं बहरीन सरकार के अनुसार, वहां कई बार हवाई सायरन बजे।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हाल के अमेरिकी हमलों में दर्जनों लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने भी अपने कई और सैनिकों के घायल होने की पुष्टि की है।
ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से बाधित कर दी, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमत 86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन सप्ताह के न्यूनतम स्तर पर आ गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ईरान में भी हम बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहे हैं और इसके नतीजे बहुत जल्द दुनिया के सामने होंगे।’’
युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी। अब ट्रंप पर युद्ध समाप्त करने और लंबे समय तक चलने वाले पश्चिम एशिया संघर्ष से दूरी बनाने का घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है।
ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अमेरिका के हवाई हमलों में ईरान के दक्षिणी होरमोज़गान प्रांत में स्थित एक बिजली संयंत्र और समुद्री जल को मीठा बनाने के संयंत्र को निशाना बनाया गया। ये हमले बोंजी नामक गांव में किए गए, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के तट पर स्थित है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, रातभर हुए हवाई हमलों में दो सुरंगें और एक पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे बंदर अब्बास जाने वाले प्रमुख राजमार्गों में से एक पर यातायात बाधित हो गया। बंदर अब्बास शहर होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे संकरे हिस्से के निकट स्थित है। ईरान ने यह भी बताया कि जलडमरूमध्य के भीतर स्थित सामरिक महत्व के केशम द्वीप पर भी हवाई हमले किए गए।
ईरान के सरकारी मीडिया ने एक दिन पहले बताया था कि अमेरिका ने राजमार्गों और रेलवे पुलों पर हवाई हमले किए। माना जा रहा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान के प्रमुख बंदरगाह बंदर अब्बास को देश के मध्य क्षेत्र और वहां से राजधानी तेहरान की ओर जाने वाले सड़क मार्गों से अलग-थलग करना था।
ईरान ने पहली बार स्वीकार किया कि अमेरिकी हमलों में उसके बिजली घरों को भी नुकसान पहुंचा है। ऊर्जा मंत्रालय ने दक्षिणी प्रांतों के लोगों से बिजली की बचत करने की अपील की, हालांकि यह नहीं बताया कि कौन-से प्रतिष्ठान प्रभावित हुए।
ईरानी अधिकारियों ने बताया कि हाल के अमेरिकी हमलों में कम से कम 50 लोगों की मौत हुई है और 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। शुक्रवार को एक पुल पर हुए हमले में आठ लोगों की जान गई।
ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने शनिवार को अमेरिका की सैन्य मौजूदगी वाले देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें ‘‘उचित जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए’’। इस बीच, ईरान समर्थक प्रदर्शनकारी राजधानी में पिछले 100 दिनों से जारी अपने रात्रिकालीन प्रदर्शनों को जारी रखे हुए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि सोमवार से अब तक 13 और अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें 10 सेना के जवान और तीन नौसेना के कर्मी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने इससे अधिक जानकारी नहीं दी। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 14 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 427 घायल हुए हैं।
ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर केवल उसका नियंत्रण होना चाहिए और वहां से गुजरने वाले जहाजों को तेहरान को शुल्क देना चाहिए, जबकि अधिकतर देश कई दशकों से इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानती रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में फिर चेतावनी दी है कि ईरान पर दबाव बनाने और जलडमरूमध्य पर उसकी पकड़ कमजोर करने के लिए वह ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बना सकते हैं। शांति काल में दुनिया में कारोबार होने वाले लगभग पांचवें हिस्से के तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन इसी जलडमरूमध्य से होता था।
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी भी दोबारा लागू कर दी है, ताकि उसके कच्चे तेल के निर्यात को रोका जा सके।
मरीनट्रैफिकडाटकॉम के अनुसार, बृहस्पतिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर केवल आठ रह गई, जो पिछले तीन सप्ताह में सबसे कम है।
हालांकि, क्षेत्र की ऊर्जा का बढ़ता हिस्सा अब पाइपलाइन के जरिये भेजा जा रहा है, लेकिन यह जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री परिवहन में आई गिरावट की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
एपी अमित प्रशांत
प्रशांत