ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखने के निर्णय के बाद अमेरिका का रुख और कड़ा

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ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखने के निर्णय के बाद अमेरिका का रुख और कड़ा

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  • Publish Date - March 26, 2026 / 04:30 PM IST,
    Updated On - March 26, 2026 / 04:30 PM IST

दुबई, 26 मार्च (एपी) पश्चिम एशिया में संघर्ष विराम के लिए राजनयिक प्रयास बृहस्पतिवार को विफल होते दिखे क्योंकि ईरान और अमेरिका ने अपने रुख को और कड़ा कर लिया।

तेहरान ने महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण को औपचारिक रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया, जबकि वाशिंगटन ने क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों को भेजने की तैयारी शुरू कर दी, जिनका उपयोग ईरान में जमीनी कार्रवाई के लिए किया जा सकता है।

बृहस्पतिवार को ईरान की ओर से आने वाली मिसाइलों की चेतावनी के लिए इजराइल में सायरन बजने लगे जबकि संयुक्त अरब अमीरात में अबू धाबी के ऊपर मार गिराई गई मिसाइल के मलबे की चपेट में आकर दो लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हुए।

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान एक ‘‘वास्तविक टोल नाका’’ व्यवस्था लागू कर रहा है, जिसमें कुछ जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए चीनी मुद्रा युआन में भुगतान कर रहे हैं।

इस बीच, पोत ‘यूएसएस त्रिपोली’ लगभग 2,500 नौसैनिकों के साथ पश्चिम एशिया की ओर बढ़ गया है। साथ ही, 82वीं एयरबोर्न बटालियन के कम से कम 1,000 सैनिकों को भी इस क्षेत्र में भेजा गया है।

मौजूदा हालात में, ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका का ध्यान संभवतः खार्ग द्वीप पर स्थित ईरान के तेल टर्मिनल या जलडमरूमध्य के पास के अन्य स्थलों पर नियंत्रण हासिल करने पर केंद्रित है।

अमेरिकी नौसेना के एडमिरल ब्रैड कूपर ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ जारी युद्ध में अमेरिकी बल अब तक 10,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले कर चुके हैं।

कूपर ने कहा, ‘‘हमारे सटीक हमलों ने ईरानी हवाई रक्षा प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है और हमारी लड़ाकू उड़ानें असरदार साबित हुई हैं।’’

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ‘‘ईरानी नौसेना के सबसे बड़े पोतों’’ में से 92 प्रतिशत पोतों को नष्ट कर दिया है।

ईरान की समाचार एजेंसियों – फार्स और तसनीम ने सांसद मोहम्मदरेजा रेजाई कूची के हवाले से कहा कि संसद जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य गुजरने देने के लिए शुल्क लगाने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम इसको (जहाज) सुरक्षा प्रदान करते हैं, और यह स्वाभाविक है कि जहाज और तेल टैंकर इसके लिए शुल्क चुकाएं।’’

जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ और खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर उसके लगातार हमलों ने तेल की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है और वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चा तेल बृहस्पतिवार सुबह 104 अमेरिकी डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जो युद्ध शुरू होने के दिन से 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।

एपी शफीक वैभव

वैभव