ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया विवि को गुरुग्राम में परिसर स्थापित और संचालित करने की स्वीकृति मिली
ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया विवि को गुरुग्राम में परिसर स्थापित और संचालित करने की स्वीकृति मिली
(तस्वीरों के साथ)
मेलबर्न, नौ जुलाई (भाषा) विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया विश्वविद्यालय को भारत के गुरुग्राम में अपना परिसर स्थापित और संचालित करने की स्वीकृति मिल गई है, जो लोगों के बीच आपसी संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में शैक्षिक साझेदारी का एक हिस्सा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनमें भारत में परिसर खोलने के लिए एक और ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय को आशय पत्र सौंपना और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) एवं यहां एक तीसरे विश्वविद्यालय के बीच सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना शामिल है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज ने भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की ‘‘बढ़ती मौजूदगी’’ और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने, नवोन्मेष को बढ़ावा देने तथा लोगों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने में शैक्षिक साझेदारी के योगदान पर संतोष व्यक्त किया।
तीन देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में एक दिन पहले मेलबर्न पहुंचे मोदी ने यहां प्रधानमंत्री अल्बनीज की मेजबानी में आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया।
दोनों नेताओं ने आमने-सामने बातचीत की और उसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया समग्र रणनीतिक साझेदारी के छह साल सफलतापूर्वक पूरे होने पर खुशी व्यक्त की।
ऑस्ट्रेलिया की अपनी यात्रा के दौरान मोदी के कई निर्णयों में से एक निर्णय विक्टोरिया विश्वविद्यालय को स्वीकृति का पत्र सौंपना है, जिससे उसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गुरुग्राम में अपना परिसर स्थापित एवं उसे संचालित करने की अनुमति मिल गई है।
इसकी वेबसाइट के अनुसार, विक्टोरिया विश्वविद्यालय एक संस्थान के तौर पर 100 से अधिक वर्षों से मेलबर्न के पश्चिमी हिस्से और इसके बाहर के छात्रों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराता आ रहा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में एक और निर्णय भारत में परिसर खोलने के लिए फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय को आशय पत्र सौंपे जाने का है। इससे यह संस्थान बेंगलुरु में अपना परिसर स्थापित कर सकेगा।
भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी एक बयान में मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने ‘‘दोनों देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लगातार विस्तार’’ पर भी ज़ोर दिया।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि दोनों देश शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश करके ‘‘अपने रिश्तों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध’’ हैं।
बयान में अल्बनीज के हवाले से कहा गया, ‘‘भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय परिसर हमारी शिक्षा साझेदारी का एक अहम आधार हैं, जो दोनों देशों में नवोन्मेष, कौशल विकास और आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं।’’
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि शिक्षा और कौशल ऑस्ट्रेलिया तथा भारत के रिश्तों के ‘‘मुख्य स्तंभ’’ हैं।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत में परिसर खोलने के लिए फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय को मंजूरी मिलने का स्वागत किया। इसके साथ ही यह विश्वविद्यालय भारत भर में परिसर खोलने की अनुमति पाने वाले सात अन्य ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में शामिल हो गया है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने भारत में ऑस्ट्रेलिया के बढ़ते व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रमों के फायदों पर भी ध्यान दिया। साथ ही, उन्होंने भारत में खनन और खनन उपकरण, प्रौद्योगिकी और सेवाओं के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र को बढ़ावा देने के लिए ‘वेस्टर्न ऑस्ट्रेलियन टेफ’ और भारत के बीच हुए समझौते का स्वागत किया।
यात्रा के अन्य परिणामों में, सीएसआईआर और मेलबर्न विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होना भी शामिल है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह दोनों संस्थानों के बीच भविष्य के सहयोग के लिए संबंध स्थापित करता है, जिसमें औषधि लक्ष्य पहचान के लिए संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम, प्रशिक्षु कार्यक्रम और संकाय विनिमय कार्यक्रम शामिल हैं।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर होने का भी स्वागत किया, जो महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों पर कनाडा के साथ त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देगा।
बयान में कहा गया, ‘‘दोनों प्रधानमंत्रियों ने कोकोस कीलिंग द्वीप समूह पर एक अस्थायी अंतरिक्ष ट्रैकिंग टर्मिनल चालू करने की भी घोषणा की, जो भारत के ऐतिहासिक गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को सहयोग प्रदान करेगा।’’
इसमें कहा गया, ‘‘हम भारत के गगनयान अंतरिक्ष प्रक्षेपण मिशन का समर्थन करने और यह दिखाने के लिए उत्साहित हैं कि ऑस्ट्रेलिया अंतरिक्ष अन्वेषण में एक भरोसेमंद साझेदार है।’’
भाषा नेत्रपाल पवनेश
पवनेश

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