ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा, एआई को लेकर चेतावनियों को गंभीरता से लेना चाहिए
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा, एआई को लेकर चेतावनियों को गंभीरता से लेना चाहिए
संयुक्त राष्ट्र, 23 सितंबर (एपी) ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले संबोधन में कहा कि विश्व के नेताओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की निगरानी के लिए वैश्विक मानक तय करने चाहिए, क्योंकि “इस प्रौद्योगिकी से जुड़े बुनियादी फैसले संयोग के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते।”
बर्नहैम ने कहा कि ब्रिटेन अन्य देशों को एआई मॉडल की पारदर्शिता और उन तक पहुंच से जुड़े नियम अपनाने के लिए मनाने की कोशिश करेगा और इससे भी कठिन काम के तौर पर प्रौद्योगिकी कंपनियों को भी इन नियमों को अपनाने के लिए राजी करने का प्रयास करेगा।
उन्होंने कहा कि एआई में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन यह “हमारे रहने और काम करने के तरीके में बदलाव का स्रोत और जोखिम को बढ़ाने वाला कारक” भी होगा।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि रूस एवं अन्य देश एआई की मदद से गलत और भ्रामक सूचनाओं का इस्तेमाल लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ने यूरोपीय संघ से अलग होने के लिए मतदान करने के बाद के दशक में इसका सामना किया है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने ब्रिटेन के सुरक्षा प्रमुखों से इस खतरे से निपटने के लिए ‘राष्ट्रीय सूचना रक्षा केंद्र’ स्थापित करने को कहा है।
बर्नहैम ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजराइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर एक बैठक की अध्यक्षता भी की। उनके साथ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान भी थे।
उन्होंने कहा कि इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के दो-राष्ट्र समाधान को बनाए रखना जरूरी है।
बर्नहैम ने कहा कि दो-राष्ट्र समाधान लागू करने में विफलता से उन राजनेताओं के प्रति “विश्वास और कमजोर होगा”, जिन्होंने इस मुद्दे पर बात की है लेकिन कोई कदम नहीं उठाया।
उन्होंने दर्जनों देशों के प्रतिनिधियों से कहा कि ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों के साथ व्यापार पर रोक लगा दी है, क्योंकि “ई1” बस्ती विस्तार योजना “दो-राष्ट्र समाधान को रोकने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास” है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा, “हम सभी ऐसे दौर में रह रहे हैं जब राजनीति में विश्वास का स्तर कम है। इस कमरे में मौजूद कई लोगों और दुनियाभर के कई राजनेताओं ने दशकों से दो-राष्ट्र समाधान की बात की है। लेकिन अगर हम अपने शब्दों को कार्यों का समर्थन देने में विफल रहते हैं, तो हम राजनीतिक, कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया में विश्वास को और कमजोर करेंगे।”
एपी रंजन संतोष
संतोष

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