ग्रेट बैरियर रीफ के लिए लंबे समय से खतरा बना है जल प्रदूषण, समाधान की योजनाएं नाकाफी

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ग्रेट बैरियर रीफ के लिए लंबे समय से खतरा बना है जल प्रदूषण, समाधान की योजनाएं नाकाफी

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  • Publish Date - July 15, 2026 / 03:21 PM IST,
    Updated On - July 15, 2026 / 03:21 PM IST

(जॉन सी. डे और रॉब कोल्स, जेम्स कुक विश्वविद्यालय)

टाउन्सविल (ऑस्ट्रेलिया), 15 जुलाई (द कन्वरसेशन) जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले प्रवाल विरंजन (कोरल ब्लीचिंग) को आमतौर पर ग्रेट बैरियर रीफ के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता है, लेकिन दुनिया की इस सबसे बड़ी प्रवाल भित्ति प्रणाली के सामने खराब जल गुणवत्ता भी एक गंभीर चुनौती है।

खेती, शहरों और वन क्षेत्रों से बहकर नदियों में पहुंचने वाली मिट्टी (तलछट) समुद्र में दूर तक पहुंच जाती है। इसकी अधिक मात्रा प्रवाल भित्तियों और समुद्री घास (सीग्रास) के मैदानों को ढक सकती है, जबकि उर्वरकों और कीटनाशकों के अवशेष स्थिति को और खराब कर देते हैं।

जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक समस्या है, लेकिन जल गुणवत्ता ऐसा मुद्दा है जिस पर ऑस्ट्रेलिया सीधे कार्रवाई कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने हाल के वर्षों में बार-बार इस पर चिंता जताई है। वर्ष 2023 के बाद जारी चौथे मसौदा निर्णय में भी जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ खराब जल गुणवत्ता को प्रमुख खतरा बताया गया है।

मसौदे में 2024-25 में प्रवाल विरंजन, खराब जल गुणवत्ता, मछली पकड़ने के ऐसे गैर टिकाऊ तरीके और तटीय भूमि के अनुचित उपयोग से हुए नुकसान पर ऑस्ट्रेलियाई सरकार से रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही तटीय जल में ड्रेजिंग (तल की खुदाई) से निकले तलछट को डालने से पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करने का भी अनुरोध किया गया है।

अप्रैल में क्वींसलैंड और संघीय सरकार ने जल गुणवत्ता सुधारने के लिए नई रणनीति जारी की। लेकिन इसमें स्पष्ट जिम्मेदारियां, पर्याप्त बजट और व्यावहारिक कार्ययोजना का अभाव है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भूमि से बहकर आने वाला प्रदूषण लंबे समय से रीफ के लिए सबसे बड़ा स्थानीय खतरा रहा है। समुद्री घास को जीवित रहने के लिए पर्याप्त प्रकाश चाहिए, लेकिन अधिक तलछट प्रकाश रोक देती है और पौधों को नष्ट कर सकती है। यही स्थिति प्रवाल भित्तियों के साथ भी होती है, विशेषकर जब तलछट में कीटनाशक और अन्य प्रदूषक मिले हों।

जल गुणवत्ता सुधारने के लिए किसानों को नदियों में बहकर जाने वाली मिट्टी कम करनी होगी तथा उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग घटाना होगा। हालांकि प्रदूषण के लिए केवल खेती ही नहीं, बल्कि उद्योग, शहर और कस्बे भी जिम्मेदार हैं।

उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग में कुछ कमी आई है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया अब तक तलछट, कीटनाशकों और उर्वरकों से निकलने वाले घुलनशील अजैव नाइट्रोजन जैसे प्रदूषकों में कमी लाने के अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नई रणनीति के क्रियान्वयन, वित्तपोषण और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय को लेकर गंभीर सवाल हैं। वर्ष 2018 से 2022 के बीच रीफ से जुड़े 35 नदी जलग्रहण क्षेत्रों में 6.8 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि साफ की गई, जिसमें लगभग 90 प्रतिशत भूमि पशुपालन के लिए तैयार की गई।

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने पिछले वर्ष ग्रेट बैरियर रीफ की स्थिति को ‘गंभीर’ बताया था। वहीं, ग्रेट बैरियर रीफ मरीन पार्क प्राधिकरण की 2024 रिपोर्ट में इसकी दीर्घकालिक स्थिति को ‘बेहद खराब’ करार देते हुए जल गुणवत्ता सुधार के प्रयासों को केवल ‘आंशिक रूप से प्रभावी’ बताया गया।

लेख के अनुसार, रीफ की रक्षा के लिए सरकारों को नदी जलग्रहण क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन, टिकाऊ कृषि पद्धतियों, नदी किनारे की वनस्पति के संरक्षण, वर्षा जल और सीवेज प्रबंधन में सुधार तथा वनों की कटाई और समुद्री कचरे पर प्रभावी नियंत्रण जैसे वैज्ञानिक आधार वाले उपायों में अधिक निवेश करना होगा। इसी महीने यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति इस मसौदा निर्णय पर विचार करेगी। इसके बाद यह देखना होगा कि ऑस्ट्रेलिया इन प्रमुख खतरों से निपटने के लिए कितने प्रभावी कदम उठाता है।

द कन्वरसेशन अमित शोभना

शोभना