समुद्र में कहां से आते हैं सीप?

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समुद्र में कहां से आते हैं सीप?

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  • Publish Date - January 27, 2026 / 03:11 PM IST,
    Updated On - January 27, 2026 / 03:11 PM IST

(माइकल कोवालेस्की, यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा और थॉमस के फ्रेजर, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा)

तल्लाहसी, 27 जनवरी (द कन्वरसेशन) समुद्र में बड़ी संख्या में सीपियां देखने के बाद भी कई बार आप उन्हें हल्के में ले सकते हैं लेकिन वैज्ञानिकों का अनुमान है कि कैलिफोर्निया की खाड़ी के किनारे बीच के सिर्फ एक छोटे से हिस्से में कम से कम 2 हजार अरब सीपियां हैं।

सोचिए अगर आज पृथ्वी पर मौजूद हर व्यक्ति सीप इकट्ठा करने जाए तो उनमें से हर कोई लगभग 1,000 सीपियां ले पाएगा।

लेकिन ये सभी सीपियां कहां से आती हैं, और वे हमें क्या कहानियां बता सकती हैं?

हम जीवाश्म विज्ञानी और समुद्र पारिस्थितिकी विज्ञानी हैं और हमारे वैज्ञानिक अनुसंधान में सीपियों को देखना और यह पता लगाना शामिल है कि वे कहां से आई हैं और कितनी पुरानी हैं।

बीच पर कंकाल::

सीप बस जीवों के कंकाल ही हैं। लेकिन इंसानों और अधिकतर दूसरे पशुओं से अलग, इन घोंघों, क्लैम, ऑयस्टर और मसेल्स में एक एक्सोस्केलेटन होता है, जिसका मतलब है कि यह उनके शरीर के बाहर होता है।

जब सीपियों की बात होती है, तो उनका मतलब आमतौर पर घोंघों जैसे जीवों के बाहरी खोल यानी शेल से होता है। कई दूसरे समुद्री जीव भी कंकाल बनाते हैं, जिनमें सैंड डॉलर जैसे इकाइनोइड्स शामिल हैं जो अंदरूनी कंकाल बनाते हैं।

ये समुद्री जीव अपने नरम शरीर को बाहरी खतरों, जैसे शिकारियों या उनके रहने की जगह में होने वाले बदलावों से बचाने के लिए अपने शेल खुद बनाते हैं। शेल इन समुद्री जीवों को समुद्र तल पर स्थिर रहने, बड़ा होने या ज़्यादा अच्छे से घूमने में भी मदद कर सकते हैं।

इस बाहरी आवरण या शेल बनाने की प्रक्रिया को ‘बायोमिनरलाइजेशन’ कहते हैं। समुद्री जानवर शेल कैसे बनाते हैं, यह अलग-अलग प्रजातियों के हिसाब से अलग हो सकता है, लेकिन इन सभी जानवरों के शेल बनाने के लिए खास ऊतक होते हैं।

अधिकतर समुद्री जीव अपने शेल कैल्शियम कार्बोनेट से बनाते हैं, जो एक मजबूत मिनरल है और लाइमस्टोन में भी पाया जाता है। कुछ स्पंज और सूक्ष्मजीव एक और पदार्थ सिलिका का इस्तेमाल करते हैं। एक समूह ऐसा भी है जो कैल्शियम फॉस्फेट का इस्तेमाल करके शेल बनाता है, जिसका इस्तेमाल हम अपनी हड्डियां बनाने के लिए भी करते हैं।

पृथ्वी पर आज मौजूद इन जीवों की 50,000 से अधिक प्रजातियां एक अलग शेल बनाती हैं। इसी वजह से बीच पर मिलने वाले सीपों के आकार में इतनी विविधता होती है।

हड्डियों की तरह ही, सीपियां भी बहुत लंबे समय तक रह सकती हैं। मृत जीवों के सीप समुद्री की लहरों से इधर-उधर होते रहते हैं और इनमें से कई आखिर में किनारे पर बहकर आ जाते हैं। दूसरी कुछ सीपियां समुद्र तल के नीचे दब जाती हैं। दबाव और समय के साथ ये जीवाश्म में बदल जाती हैं।

सीपियां हमें क्या सिखा सकती हैं::

समुद्री जीवों की इतनी अधिक संख्या के अलावा, सीपियों के इतने अधिक होने का एक और कारण यह है कि वे बहुत लंबे समय तक चलती हैं।

हमारे अनुसंधान में, हम यह पता लगाने के लिए कार्बन डेटिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं कि कोई सीप कितनी पुरानी है। पुराने शेल में कम रेडियोकार्बन होता है, और वैज्ञानिक इसी आधार पर उनकी उम्र का अंदाजा लगा सकते हैं।

इस प्रक्रिया के दौरान हमने पाया कि समुद्र में कई सीप सैकड़ों या हजारों साल पुराने हैं।

ये सीपियां सिर्फ देखने में ही सुंदर नहीं हैं, बल्कि उपयोगी भी हैं। छोटी ‘टाइम मशीन’ की तरह, ये सीप अपने अंदर पुराने समय के बारे में बहुत सारी जानकारी रखते हैं, जिसमें उन जगहों का विवरण भी शामिल है जहां वे रहते थे। सीप की रासायनिक बनावट का अध्ययन करके वैज्ञानिक पुराने मौसम और माहौल के बारे में जान सकते हैं। हम अक्सर यह भी पता लगा सकते हैं कि यह सीप जिस जीव का है उसकी मौत कैसे हुई और उसे अपनी जिंदगी में किन खतरों का सामना करना पड़ा।

(द कन्वरसेशन) वैभव नरेश

नरेश