‘जी7’ सदस्य देशों के लिए मस्तिष्क स्वास्थ्य एक अत्यावश्यक प्राथमिकता क्यों?

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‘जी7’ सदस्य देशों के लिए मस्तिष्क स्वास्थ्य एक अत्यावश्यक प्राथमिकता क्यों?

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  • Publish Date - May 21, 2026 / 03:12 PM IST,
    Updated On - May 21, 2026 / 03:12 PM IST

(गाय रौलेउ, मैकगिल विश्वविद्यालय)

मॉन्ट्रियल, 21 मई (द कन्वरसेशन) हड्डियों से बने कपाल के भीतर सुरक्षित मानव मस्तिष्क आज भी चिकित्सा जगत के लिए काफी हद तक एक रहस्य बना हुआ है।

माना जाता है कि संरचनात्मक रूप से बेहद जटिल और कठिन बनावट वाला मस्तिष्क 3,000 से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से बना है, जबकि शरीर के अधिकांश ऊतकों में मुश्किल से 12 प्रकार की कोशिकाएं होती हैं। मस्तिष्क गतिशील है, वातावरण के अनुसार प्रतिक्रिया करता है और समय के साथ विकसित होता है। इसे जांचना भी कठिन है और बहुत कम मामलों में इसकी बायोप्सी की जाती है।

फिर भी मस्तिष्क ही हमारी पहचान और अस्तित्व का मूल है। यही हमें सोचने, संवाद करने, दूसरों से जुड़ने, महसूस करने, चलने-फिरने और दुनिया का अनुभव करने की क्षमता देता है।

हमारे समाजों और अर्थव्यवस्थाओं की प्रगति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि हमारा मस्तिष्क कितनी अच्छी तरह काम करता है। घटती जन्मदर और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच दुनिया एक ऐसी चुनौती का सामना कर रही है, जहां बच्चों की संख्या कम हो रही है और बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में हर नागरिक के बेहतर मस्तिष्क स्वास्थ्य की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

जून 2026 में फ्रांस के एवियन में होने वाली ‘जी7’ देशों की बैठक मस्तिष्क स्वास्थ्य को शीर्ष प्राथमिकता बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है।

बढ़ती बुजुर्ग आबादी की चुनौती

मानव जीवन के दौरान कई ऐसे कारक होते हैं जो मस्तिष्क स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ बच्चे बौद्धिक अक्षमता, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और सीखने में कठिनाई जैसी मस्तिष्क-विकास संबंधी समस्याओं के साथ जन्म लेते हैं।

कुछ बच्चों को जन्म से पहले पर्याप्त देखभाल नहीं मिलती, पोषण की कमी होती है या वे हिंसा और दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। इससे उनके मस्तिष्क का विकास प्रभावित हो सकता है और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसे बच्चों को जीवन में खुशहाल और संतोषजनक अवसर कम मिल पाते हैं और वे समाज में अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान नहीं दे पाते।

दूसरी ओर, बुजुर्गों की बढ़ती आबादी ‘अल्जाइमर’, ‘पार्किंसन’, ‘एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस’ (एएलएस) और डिमेंशिया जैसी अन्य तंत्रिका-अपक्षयी बीमारियों से प्रभावित हो रही है। ‘जी7’ देशों में इन बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है।

मस्तिष्क स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उपाय

एक समाज के रूप में हमें मस्तिष्क स्वास्थ्य सुधारने के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे। इसके लिए दो प्रमुख रणनीतियां अपनाई जा सकती हैं।

पहली रणनीति यह है कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और प्रभावी उपायों को बड़े स्तर पर अपनाया जाए।

बच्चों के लिए इनमें बेहतर प्रसवपूर्व देखभाल, इंद्रियों को सक्रिय करने वाली गतिविधियां, सामाजिक संपर्क, बेहतर पोषण, नियमित व्यायाम और सिर में चोट से बचाव शामिल हैं।

वयस्कों के लिए उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, मोटापा और धूम्रपान जैसे जोखिम कारकों को कम करना जरूरी है। इसके साथ ही बेहतर खानपान, शारीरिक सक्रियता, अच्छी नींद और सामाजिक मेलजोल भी आवश्यक हैं।

इन उपायों को सरकारों द्वारा बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, कनाडा जैसे देशों में धूम्रपान छोड़ो अभियानों ने फेफड़ों के कैंसर के मामलों को कम करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

मस्तिष्क अनुसंधान के लिए वित्तपोषण जरूरी

हालांकि, मस्तिष्क स्वास्थ्य सुधारने के लिए कई प्रभावी उपाय मौजूद हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल अभी भी सीमित स्तर पर ही हो रहा है। यहां तक कि अगर हर व्यक्ति इन्हें अपनाए भी, तब भी मस्तिष्क-विकास और तंत्रिका-अपक्षयी बीमारियों को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं होगा।

इसलिए दूसरी रणनीति के तहत मस्तिष्क स्वास्थ्य सुधारने के लिए नए उपाय विकसित करने होंगे।

इसके लिए दुनिया भर, खासकर जी7 देशों में मस्तिष्क अनुसंधान के लिए लक्षित और निरंतर वित्तपोषण की जरूरत है। इन देशों के पास वृद्ध होती आबादी के साथ-साथ अनुसंधान में निवेश करने की आर्थिक और तकनीकी क्षमता भी है।

‘ओपन साइंस रिसर्च मॉडल’ की जरूरत

मस्तिष्क की जटिलता और उसके अध्ययन से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए वैज्ञानिकों की बड़ी सहयोगी टीमों की आवश्यकता होगी।

इसी वजह से ‘ओपन साइंस रिसर्च मॉडल’ अपनाना बेहद जरूरी है, ताकि आंकड़ों, एल्गोरिद्म और शोध सामग्री को गोपनीयता और संप्रभुता बनाए रखते हुए तेजी से और स्वतंत्र रूप से साझा किया जा सके।

उदाहरण के लिए, कृत्रिम मेधा की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए बड़े और उच्च गुणवत्ता वाले डेटा सेट खुले रूप में उपलब्ध होने चाहिए।

इन सभी कारणों से, ‘जी7’ देशों की विज्ञान अकादमियां ‘जी7’ नेताओं से यह अनुशंसा करती हैं कि वे सभी सदस्यों के लिए मस्तिष्क स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। ऐसा करने से न केवल लोगों का जीवन बेहतर होगा, बल्कि पूरे समाज के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।

द कन्वरसेशन

खारी नरेश

नरेश