यूनुस ने मुझे पद से हटाने की कोशिश की थी : बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन

यूनुस ने मुझे पद से हटाने की कोशिश की थी : बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन

यूनुस ने मुझे पद से हटाने की कोशिश की थी : बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन
Modified Date: February 23, 2026 / 09:13 pm IST
Published Date: February 23, 2026 9:13 pm IST

ढाका, 23 फरवरी (भाषा) बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने खुलासा किया है कि पूर्ववर्ती अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने उन्हें कई बार पद से हटाने की कोशिश की थी।

शहाबुद्दीन ने यह खुलासा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व में सरकार गठित होने के कुछ दिन बाद किया है।

राष्ट्रपति ने प्रमुख बांग्ला अखबार ‘कालेर कंठो’ में रविवार को प्रकाशित साक्षात्कार में कहा कि अंतरिम सरकार ने 18 महीनों के कार्यकाल के दौरान वह ‘‘कहीं किसी चर्चा में नहीं रहे, लेकिन उनके खिलाफ कई साजिशें रची गईं’’।

शहाबुद्दीन ने कहा कि उन्हें सशस्त्र बलों के प्रमुखों से ‘‘उच्चतम स्तर का समर्थन’’ मिला, जो ‘‘समय-समय पर मेरे पास आए और मेरा मनोबल बढ़ाया’’।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘उन्होंने मुझसे सिर्फ एक ही बात कही थी – ‘महामहिम, आप सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं। आपकी हार का अभिप्राय पूरे सशस्त्र बलों की हार होगी। हम हर कीमत पर इसे रोकेंगे’ और अंत में, उन्होंने ठीक वैसा ही किया।’’

शाहबुद्दीन ने कहा, ‘‘यूनुस के शासनकाल के दौरान संविधान को रद्द करने के कई प्रयास किए गए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कई तरह से पद से हटाने की कोशिश की गई, लेकिन मैं किसी भी परिस्थिति में नहीं टूटा।’’

संविधान विशेषज्ञों के मुताबिक, राष्ट्रपति को पद से हटाने से एक संवैधानिक रिक्तता की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी जिससे सेना, नागरिक नौकरशाही और न्यायिक प्रणाली भी प्रभावित होती।

संविधान के तहत शहाबुद्दीन से शपथ लेने के बाद यूनुस-नीत अंतरिम सरकार ने संसद को भंग कर दिया और खुद को ‘क्रांति के बाद की सरकार’ कहना शुरू कर दिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि वह ‘स्पष्ट रूप से’ कह सकते हैं कि नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में वर्तमान सत्तारूढ़ बीएनपी का शीर्ष नेतृत्व उनके साथ खड़ा है और ‘संवैधानिक निरंतरता’ को बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करता है।

शहाबुद्दीन ने बताया कि उस दौरान (यूनुस सरकार के आने के बाद), रातोंरात, भीड़ उनके आवास ‘बंगभवन’ के सामने सड़क पर जमा हो गई, ताकि उनपर पद छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा सके, जबकि सेना के जवानों ने राष्ट्रपति भवन के आसपास निगरानी तेज कर दी।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘बाईस अक्टूबर 2024 को बंगभवन को घेर लिया गया। यह पार्टी, वह पार्टी, मंच, ओकिया- रातोंरात इतने सारे मंच बन गए! ये एक ही तरह के लोग थे, जो अलग-अलग मंचों पर अलग-अलग नामों से सक्रिय थे। शहाबुद्दीन ने सवाल किया कि उन्हें इतना पैसा कहां से मिला?’’

शहाबुद्दीन ने कहा, ‘‘वह रात मेरे लिए किसी बुरे सपने जैसी थी… सेना ने स्थिति को बहुत सख्ती से नियंत्रित किया।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि अंतरिम सरकार के भीतर से ही उन्हें पद से हटाने का एक और प्रयास किया गया था, जब सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों ने सीधे तौर पर यूनुस को बताया कि वे किसी भी असंवैधानिक कार्रवाई को होने नहीं देंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि मेरे ऊपर से गुजरे उस तूफान को सहने की ताकत किसी और में थी या नहीं।’’

बांग्लादेश में छात्रों के हिंसक प्रदर्शन ‘जुलाई विद्रोह’ के बाद पांच अगस्त 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपदस्थ कर दिया गया और उसके बाद शाहबुद्दीन ने यूनुस को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ दिलाई थी।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘यूनुस ने शायद 14 से 15 बार विदेश यात्रा की। उन्होंने मुझे एक बार भी सूचित नहीं किया। वे एक बार भी मुझसे मिलने नहीं आए।’’ उन्होंने कहा कि यह व्यवहार संविधान के उस प्रावधान के विपरीत था, जिसमें सरकार के मुखिया को राष्ट्रपति से मिलने और उन्हें यात्रा के परिणामों के बारे में जानकारी देने की आवश्यकता होती है।

शहाबुद्दीन ने हालांकि स्वीकार किया कि उस समय जारी किए गए कई अध्यादेश (राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित अंतरिम आदेश) अनावश्यक थे, जिन्हें संवैधानिक आधार पर न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। वहीं, कई राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि उनमें से कई सीधे संविधान के विपरीत थे।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने कुछ महीने पहले दिये एक साक्षात्कार में कहा था कि यूनुस के शासन में, ‘‘मेरी आवाज दबा दी गई है।’’

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश


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