Bride refuses to Marry due to Rahul Gandhi: राहुल गांधी की वजह से टूट गई युवक की शादी, युवती ने कहा- हारने वाला को अपना रोल मॉडल मानने वाले के साथ नहीं ले सकती सात फेरे / Image: AI Generated
बेंगलुरु: Bride refuses to marry due to Rahul Gandhi नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दिनों युवाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हुए सत्ता का रास्ता तलाश रहे हैं। राहुल गांधी को युवाओं का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। लेकिन इस बीच खबर आ रही है कि एक युवक की शादी राहुल गांधी की वजह से टूट गई। बताया जा रहा है कि लड़की ने सिर्फ इस बात के लिए शादी से इंकार कर दिया क्योंकि लड़का राहुल गांधी को अपना रोल मॉडल मानता था। इस संबंध में लड़की का कहना है कि ‘अगर कोई किसी हारनेवाला को अपना रोल मॉडल मानता है तो यह समझना मुश्किल नहीं है कि उसका IQ कितना कम होगा।”
Bride refuses to marry due to Rahul Gandhi दरअसल आरुही रेड्डी नाम की युवती ने अपने अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि ”’अगर कोई किसी हारनेवाला को अपना रोल मॉडल मानता है तो यह समझना मुश्किल नहीं है कि उसका IQ कितना कम होगा। वह अपने बच्चों को गुलामी, राष्ट्रविरोध और हिंदू विरोध के अलावा और क्या सिखाएगा?’ उनका कहना है कि उनके लिए पैसा, खूबसूरती या अच्छा करियर से कहीं ज्यादा उनका देश और धर्म मायने रखता है।” उन्होंने आगे कहा कि ”एक गर्वित राष्ट्रवादी हिंदू होने के नाते वह ऐसे व्यक्ति को अपना जीवनसाथी कभी स्वीकार नहीं कर सकतीं जो राहुल गांधी को अपना रोल मॉडल मानता हो।”
I recently got a marriage proposal.
The guy was good-looking, had an impressive ₹40 lakh package, and came from a good family.
But I rejected him for just one reason—on his Instagram profile, I saw that he considered Rahul Gandhi his role model.
If someone considers a Loser…
— Aaruhi Reddy 🥷 (@CuteAaruhi4) August 17, 2026
आरुही रेड्डी का रिश्ता ठुकराने का ये अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग बहस कर रहे हैं कि क्या राजनीतिक विचारधारा भी किसी रिश्ते या शादी का फैसला लेने में इतनी बड़ी भूमिका निभा सकती है। वहीं, सियासी गलियारों से भी इस मसले पर चर्चा जोरों पर है। कुछ लोगों ने लड़की के फैसले का समर्थन किया और कहा कि रिश्ते में दोनों की राजनीतिक सोच का मिलना भी जरूरी हो सकता है। वहीं, कुछ लोगों का सवाल है कि क्या किसी की राजनीतिक पसंद को उसके व्यक्तित्व, सोच और आर्थिक स्थिरता से ज्यादा महत्व देना सही है?