(Suffocation Risk Inside Car/ Image Credit: Pexels)
Suffocation Risk Inside Car: भारत में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है और तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति गलती से कार के अंदर बंद हो जाए तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। कई मामलों में यह देखा गया है कि बंद कार के अंदर फंसने से लोगों की जान भी जा सकती है। इसलिए इस खतरे को समझना और सतर्क रहना बहुत जरूरी है।
कार के अंदर हवा का प्रवाह केवल खिड़कियों और एयर कंडीशनिंग पर निर्भर होता है। अगर ये दोनों बंद हो जाएं तो अंदर वेंटिलेशन रुक जाता है और तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। रिसर्च के अनुसार, अगर बाहर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस हो तो बंद कार के अंदर 20 से 30 मिनट में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच सकता है जो शरीर के लिए बेहद खतरनाक है।
बंद कार में कुछ ही समय में ऑक्सीजन की कमी और गर्मी का असर शुरू हो जाता है। लगभग 15 से 20 मिनट में व्यक्ति को घबराहट, सांस लेने में दिक्कत और बेचैनी महसूस होने लगती है। 30 मिनट के बाद बेहोशी और गंभीर स्थिति बन सकती है। अगर यह स्थिति एक घंटे से ज्यादा बनी रहे तो यह जानलेवा साबित हो सकती है और दम घुटने का खतरा बढ़ जाता है।
अगर कोई व्यक्ति कार के अंदर फंस जाए तो उसे तुरंत मदद मांगने की कोशिश करनी चाहिए। लगातार हॉर्न बजाना, फोन से परिवार या इमरजेंसी नंबर पर कॉल करना मददगार हो सकता है। अगर बाहर निकलने का कोई रास्ता न मिले तो खिड़की तोड़ने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चों के साथ होने पर उन्हें शांत रखना और घबराहट से बचाना बहुत जरूरी होता है।
इस तरह की स्थिति से बचने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं। बच्चों और पालतू जानवरों को कभी भी अकेला कार में न छोड़ें। कार लॉक करने से पहले हमेशा जांच करें कि कोई अंदर तो नहीं है। एक स्पेयर चाबी साथ रखना भी मददगार हो सकता है। बंद कार में सोने से बचें और गर्मियों में विशेष सतर्कता रखें। क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।