(फोटो के साथ)
सारण, 19 मई (भाषा) बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को जिलों में कार्यरत सरकारी चिकित्सकों को निर्देश दिया कि मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े अस्पतालों में रेफर करने की प्रवृत्ति बंद की जाए।
सारण जिले के सोनपुर में विभिन्न विभागों से संबंधित जन-शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए शुरू किए गए ‘सहयोग’ शिविर के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जिलों में कार्यरत सरकारी चिकित्सक मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े अस्पतालों में भेजने की प्रवृत्ति बंद करें। यह व्यवस्था 15 अगस्त से लागू होगी। यदि 15 अगस्त के बाद पंचायत और जिला स्तर के सरकारी अस्पतालों से सामान्य मामलों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया तो संबंधित सरकारी चिकित्सकों एवं अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’’
उन्होंने कहा कि कुछ गंभीर बीमारियों अथवा विशेष मामलों को छोड़कर (जो जांच के दायरे में होंगे) मरीजों का उपचार पंचायत और जिला स्तर के अस्पतालों में ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सरकार जिला स्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत कर रही है ताकि स्थानीय स्तर पर मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। पंचायत और जिला स्तर के अस्पतालों में नई एवं अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं इस वर्ष 15 अगस्त से पूरी तरह कार्यशील हो जाएंगी।’’
उन्होंने स्वास्थ्य ढांचे के प्रभावी उपयोग पर जोर देते हुए अधिकारियों से संवेदनशीलता के साथ कार्य करने और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों का भरोसा मजबूत करने का आह्वान किया।
‘सहयोग’ शिविरों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंगलवार को राज्यभर की पंचायतों में ऐसे शिविर आयोजित किए गए हैं ताकि विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित लोगों की शिकायतों और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार इस उद्देश्य के लिए पहले ही ‘सहयोग पोर्टल’ और टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1100’ शुरू कर चुकी है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘सहयोग पोर्टल’ पर दर्ज किसी आवेदन का 30 दिनों के भीतर निस्तारण नहीं करने और आदेश जारी नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ निलंबन समेत सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘पंचायत स्तर पर ‘सहयोग’ शिविर आयोजित कर 30 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान किया जाएगा। संबंधित जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक इसकी वास्तविक समय में निगरानी करेंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय भी अधिकारियों की गतिविधियों की निगरानी करेगा।’’
मुख्यमंत्री ने आम लोगों की समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इस पहल के तहत प्रत्येक माह के प्रथम और तृतीय मंगलवार को पंचायत स्तर पर ‘सहयोग’ शिविर आयोजित किए जाएंगे, जहां जन शिकायतों का निस्तारण किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जमा किए जा सकेंगे तथा प्रत्येक आवेदन का 30 दिनों के भीतर निस्तारण किया जाएगा एवं अनुपालन संबंधी विवरण ‘सहयोग पोर्टल’ पर अपलोड किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यदि संबंधित अधिकारी किसी आवेदन का 30 दिनों के भीतर निस्तारण नहीं करता, आदेश जारी नहीं करता अथवा लापरवाही बरतता है तो 31वें दिन उसका स्वत: निलंबन हो जाएगा। इसके लिए एक ऑनलाइन व्यवस्था भी विकसित की जा रही है, जिसके तहत लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ निलंबन आदेश का प्रारूप पोर्टल पर स्वत: तैयार हो जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि यदि मामला विकास कार्यों अथवा सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी जन सुविधाओं से जुड़ा है तो सरकार उसके अनुरूप निर्णय लेगी, लेकिन संबंधित मामलों का समयबद्ध निस्तारण अधिकारियों को करना होगा।
भाषा कैलाश
राजकुमार
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