बिहार में शराबबंदी हटाने से पहले शराब के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुकता जरूरी : चिराग पासवान

बिहार में शराबबंदी हटाने से पहले शराब के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुकता जरूरी : चिराग पासवान

बिहार में शराबबंदी हटाने से पहले शराब के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुकता जरूरी : चिराग पासवान
Modified Date: July 17, 2026 / 09:13 pm IST
Published Date: July 17, 2026 9:13 pm IST

पटना, 17 जुलाई (भाषा) केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने शुक्रवार को कहा कि वह और उनकी पार्टी बिहार में शराबबंदी कानून हटाने के पक्ष में तभी होंगे, जब पहले लोगों को शराब के दुष्प्रभावों के प्रति व्यापक रूप से जागरुक किया जाए।

बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार की प्रमुख नीतियों में से एक है। इसके तहत राज्य में शराब और अन्य मादक पदार्थों के निर्माण, बिक्री, भंडारण और सेवन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है।

पासवान ने पटना में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं और मेरी पार्टी हमेशा से शराब के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाने के पक्षधर रहे हैं। जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराबबंदी कानून लेकर आए थे, तब हम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा नहीं थे, फिर भी हमने इसका समर्थन किया था।’’

उन्होंने स्वीकार किया कि शराबबंदी कानून के कारण राज्य को राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन बिना पर्याप्त जन-जागरुकता के लोगों को फिर से शराब की ओर धकेलने के खिलाफ आगाह किया।

पासवान ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि अभी बिहार की बड़ी आबादी को बिना पर्याप्त जागरुकता के दोबारा शराब के दलदल में धकेलने का यह उचित समय नहीं है। शराबबंदी को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे सामाजिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। राजस्व बढ़ाने के कई अन्य तरीके हो सकते हैं और हमें उन पर ध्यान देना चाहिए।’’

हालांकि, उन्होंने कहा कि भविष्य में इस विषय पर चर्चा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचे सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास के कारण राजस्व के स्रोत बढ़ाने की आवश्यकता है, लेकिन इसका बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी पार्टी के दोनों राज्य मंत्री संजय पासवान और संजय सिंह मंत्रिमंडल की बैठकों में इस तरह के मुद्दों पर अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखते हैं। राजस्व बढ़ाने पर निश्चित रूप से जोर होना चाहिए, लेकिन इसका बोझ जनता पर नहीं पड़ना चाहिए।’’

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे पर पासवान ने कहा कि उनका पार्टी छोड़ना इस बात का संकेत है कि ‘सहनशीलता की सभी सीमाएं पार हो चुकी थीं।’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं मृत्युंजय तिवारी जी का सम्मान करता हूं। उन्होंने जिस शालीनता और मर्यादा के साथ राजद जैसी पार्टी का पक्ष रखा, वह सराहनीय है। जब उनके जैसे लोग पार्टी छोड़ते हैं तो इसका मतलब है कि सहनशीलता की सारी सीमाएं पार हो चुकी हैं।’’

पासवान ने आरोप लगाया कि ‘‘कोई व्यक्ति दीमक की तरह अंदर से राजद को खोखला कर रहा है।’’

भाषा

कैलाश रवि कांत


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