पटना, 24 फरवरी (भाषा) बिहार विधानसभा ने मंगलवार को महज 24 मिनट में चार विधेयक पारित कर दिए। सदन ने बिहार तकनीकी सेवा आयोग (संशोधन) विधेयक-2026, बिहार कर्मचारी चयन आयोग (संशोधन) विधेयक- 2026, बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक- 2026 तथा बिहार सिविल न्यायालय विधेयक- 2026 को अपनी मंजूरी दे दी।
विधेयकों पर सरकार का पक्ष रखते हुए संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि संशोधन के बाद राज्य के बोर्ड और निगमों में समूह ‘ख’ और ‘ग’ के पदों पर नियुक्तियां बिहार तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से की जाएंगी, जबकि समूह ‘घ’ के पदों पर नियुक्ति बिहार कर्मचारी चयन आयोग के जरिए होगी।
उन्होंने कहा कि अब तक बोर्ड और निगमों में इन श्रेणियों के पदों पर नियुक्तियां संबंधित संस्थानों द्वारा स्वयं की जाती रही हैं। उन्होंने कहा कि नए प्रावधान से नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार के अधीन सभी सरकारी और क्षेत्रीय कार्यालयों में समूह ‘ख’, ‘ग’ और ‘घ’ के पदों पर नियुक्तियां पहले से ही संबंधित आयोगों के माध्यम से की जा रही हैं और अब यही व्यवस्था बोर्ड एवं निगमों में भी लागू की जाएगी।
उन्होंने बताया कि बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने के बाद नगर निकायों की समितियों के सदस्यों का चयन अब अध्यक्ष द्वारा मनोनीत करने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से सदस्यों के बीच से किया जाएगा।
विधेयक पर चर्चा के दौरान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के विधायक अख्तरूल ईमान ने मांग की कि विधानमंडल सत्र के दौरान नगर निकायों की बैठकें न बुलाई जाएं। इस पर सरकार की ओर से चौधरी ने कहा कि इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।
सदन ने बिहार सिविल न्यायालय विधेयक, 2026 को भी पारित कर दिया। इसके लागू होने के बाद ‘बिहार, ओडिशा, बंगाल और असम सिविल न्यायालय’ की पूर्व व्यवस्था के स्थान पर ‘बिहार सिविल न्यायालय’ नाम प्रभावी होगा।
भाषा कैलाश शफीक
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