पटना, 31 जुलाई (भाषा) भाजपा के बिहार विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) देवेश कुमार ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने इसे ‘स्वैच्छिक’ फैसला बताया, हालांकि सूत्रों का कहना कि यह कदम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के एक सहयोगी दल के नेता को समायोजित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
देवेश कुमार ने बिहार विधान परिषद सचिवालय में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी तथा अन्य नेताओं की मौजूदगी में अपना इस्तीफा सौंपा। कुमार का छह वर्षीय कार्यकाल अगले वर्ष मार्च में समाप्त होने वाला था।
पत्रकार से नेता बने देवेश कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में केवल इतना कहा, ‘हां, मैंने अपना इस्तीफा दे दिया है। यह मेरा स्वैच्छिक फैसला था।’
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने इस घटनाक्रम पर अब तक खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन पार्टी सूत्रों ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि यह कदम राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र एवं राज्य सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद की सीट खाली करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
प्रकाश राज्य विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। उन्हें पिछले वर्ष जनता दल (यूनाइटेड) अध्यक्ष नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बनाया गया था।
इस वर्ष मई में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के एक महीने बाद दीपक प्रकाश को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।
प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाए जाने को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने बृहस्पतिवार को बिहार सरकार से पूछा था, ‘जब कोई व्यक्ति छह महीने के भीतर निर्वाचित नहीं हुआ है, तो उसे मंत्री पद पर कैसे बनाए रखा गया है?’
सूत्रों के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में काराकाट संसदीय क्षेत्र से तीसरे स्थान पर रहे उपेंद्र कुशवाहा को साथ बनाए रखने की भाजपा की कोशिशें पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं, जिसके तहत वह राज्य के प्रभावशाली अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय कोइरी मतदाताओं का समर्थन मजबूत करना चाहती है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इसी समुदाय से आते हैं। चौधरी बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री हैं।
भाषा कैलाश आशीष
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