पटना, 24 सितंबर (भाषा) बिहार के पूर्वी चंपारण में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में कथित प्रशासनिक अनियमितताओं को सोशल मीडिया पर साझा कर ‘व्हिसलब्लोअर’ बनने की कोशिश करने वाले एक छात्र के निष्कासन का आदेश पटना उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकल पीठ ने ‘मीडिया स्टडीज’ में स्नातकोत्तर कर रहे छात्र आकाश कुमार की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।
उच्च न्यायालय ने 21 सितंबर को अपने फैसले में कहा कि विश्वविद्यालय ने छात्र को कारण बताओ नोटिस और जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराए बिना 14 अगस्त 2024 को निष्कासन का आदेश जारी किया, जो विधिसम्मत प्रक्रिया के विपरीत है।
उच्च न्यायालय ने माना कि विश्वविद्यालय की कार्रवाई ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत’ का उल्लंघन करती है तथा यह ‘‘कठोर’’ और ‘‘अस्थिर’’ है।
उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि छात्र को दोबारा संस्थान में प्रवेश देकर उसका पाठ्यक्रम पूरा कराया जाए और परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर दिया जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि छात्र से अपेक्षा की जाती है कि वह संस्थान में अनुशासन बनाए रखे।
भाषा सं कैलाश
राजकुमार
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