बिहार में पात्र दोषियों को एकमुश्त विशेष सजा माफी, दो अक्टूबर को होगी रिहाई

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बिहार में पात्र दोषियों को एकमुश्त विशेष सजा माफी, दो अक्टूबर को होगी रिहाई

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 08:39 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 08:39 PM IST

पटना, 23 सितंबर (भाषा) बिहार मंत्रिमंडल ने बुधवार को पात्र सजायाफ्ता कैदियों को एकमुश्त विशेष सजा माफी देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसके तहत चयनित कैदियों को गांधी जयंती के अवसर पर दो अक्टूबर को रिहा किया जाएगा।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

मंत्रिमंडल विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि विधि विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, बिहार जेल मैनुअल, 2012 के नियम 430 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत चिन्हित श्रेणियों के पात्र दोषी कैदियों को निर्धारित पात्रता मानदंडों के आधार पर विशेष सजा माफी का लाभ दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार गांधी जयंती (2 अक्टूबर, 2026) के अवसर पर कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत सजा को पूर्ण या आंशिक रूप से माफ कर सकेगी। अब संबंधित प्राधिकार पात्र कैदियों की अंतिम सूची तैयार करेंगे।

मंत्रिमंडल ने उच्च शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर पटना में माता सीता महिला विश्वविद्यालय की स्थापना को भी मंजूरी दी। इसके लिए बिहार विशेष विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 की धारा 3(1) के तहत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन तथा अन्य व्ययों के लिए 15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।

इसी प्रकार, बेगूसराय में रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना को भी मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती पर विश्वविद्यालय की स्थापना तथा उसके लिए 15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

मंत्रिमंडल ने पुलिस आधुनिकीकरण सहायता योजना (एएसयूएमपी) के तहत 24.50 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 50 ड्रोन खरीदने की मंजूरी दी। इनका उपयोग भीड़ नियंत्रण, नक्सल विरोधी अभियान तथा आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों में किया जाएगा।

चौधरी ने बताया कि मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री पशुधन विकास ऋण योजना को भी स्वीकृति दी। योजना के तहत पशुपालकों को बैंक ऋण पर 100 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलेगा और उन्हें केवल मूलधन चुकाना होगा।

इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक तीन वर्षों की अवधि के लिए 160 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

भाषा कैलाश शफीक

शफीक