पटना, 27 फरवरी (भाषा) बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने शुक्रवार को सदन में कहा कि राज्य सरकार अन्य राज्यों में लागू धर्मांतरण निरोधक कानूनों की समीक्षा करेगी और यदि आश्यकता महसूस हुई तो बिहार में भी ऐसा कानून लागू किया जाएगा।
अध्यक्ष ने यह घोषणा विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के 18 विधायकों द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान की।
उन्होंने कहा, ‘‘बिहार सरकार निश्चित रूप से अन्य राज्यों में लागू धर्मांतरण विरोधी कानूनों की समीक्षा करेगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो वही कानून यहां भी लागू किया जाएगा।’’
सदन में मुद्दा उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक बीरेंद्र कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात सहित कई राज्यों ने ‘अवैध धर्मांतरण निषेध (संशोधन) विधेयक, 2024’ पारित कर उसे लागू किया है।
उन्होंने कहा कि इस कानून में प्रावधान है कि यदि धर्मांतरण के लिए किसी व्यक्ति को जीवन या संपत्ति का भय दिखाता है, बल प्रयोग किया जाता है या विवाह के जरिये अथवा विवाह का झांसा देकर धर्मांतरण कराया जाता है तो कड़ी सजा दी जाएगी।
विधायक ने आरोप लगाया कि बिहार के कई जिलों में अंतरधार्मिक विवाह को धर्मांतरण का माध्यम बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 10 से 20 वर्ष की लड़कियों को प्रेम के नाम पर निशाना बनाया जाता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि धर्मांतरण के कारण बिहार में मुस्लिम आबादी में असामान्य वृद्धि देखी गई है।
उन्होंने कहा कि सीमांचल क्षेत्र समेत राज्य के लगभग सभी जिलों में जबरन अंतरधार्मिक विवाह कराए जा रहे हैं।
विधायक ने कहा कि गरीब और कमजोर वर्ग, विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के लोग इसके शिकार बन रहे हैं।
बीरेंद्र कुमार ने यह भी कहा कि राज्य में चर्चों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और लगभग 5,000 चर्च विभिन्न हिस्सों में संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि जहां राष्ट्रीय स्तर पर ईसाई समुदाय की वृद्धि दर 15.52 प्रतिशत है, वहीं बिहार में यह 143.23 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि 11 राज्यों में लागू कानून की तर्ज पर बिहार में भी धर्मांतरण और जबरन विवाह पर रोक लगाने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए।
भाजपा के एक अन्य विधायक मिथिलेश तिवारी ने भी इसी प्रकार की मांग करते हुए कहा कि जो कोई धर्मांतरण के उद्देश्य से किसी व्यक्ति को जीवन या संपत्ति का भय दिखाता है, बल प्रयोग करता है, विवाह करता है या विवाह का वादा करता है, प्रलोभन देता है, षड्यंत्र रचता है, या किसी नाबालिग, महिला अथवा व्यक्ति की तस्करी करता है अथवा इस प्रकार के कृत्य में सहयोग या प्रयास करता है, तो उसे कठोर कारावास की सजा दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों में जबरन धर्मांतरण की घटनाएं हो रही हैं, इसलिए बिहार को ऐसे कानून की आवश्यकता है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, “सरकार विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दे को लेकर गंभीर है। स्थिति से निपटने के लिए सरकार द्वारा उचित कदम उठाए जाएंगे।’’
भाषा कैलाश
संतोष
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