बिहार: महिलाओं के खिलाफ ‘बढ़ते’ अपराधों को लेकर वामपंथी संगठनों का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प

बिहार: महिलाओं के खिलाफ ‘बढ़ते’ अपराधों को लेकर वामपंथी संगठनों का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प

बिहार: महिलाओं के खिलाफ ‘बढ़ते’ अपराधों को लेकर वामपंथी संगठनों का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प
Modified Date: February 10, 2026 / 11:08 pm IST
Published Date: February 10, 2026 11:08 pm IST

पटना, 10 फरवरी (भाषा) बिहार में महिलाओं के खिलाफ कथित रूप से बढ़ते अपराधों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं की मंगलवार दोपहर पटना के डाकबंगला चौराहे पर पुलिस से झड़प हो गई।

‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) व ‘ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमेन एसोसिएशन’ (एआईपीडब्ल्यूए) के कार्यकर्ता गांधी मैदान से बिहार विधानसभा तक मार्च निकाल रहे थे और उनकी योजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्ञापन सौंपने की थी लेकिन पुलिस ने उन्हें डाकबंगला चौराहे के पास रोक दिया।

पटना (मध्य) के पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहे के पास जमा हो गए और यातायात बाधित कर दिया। उन्होंने पुलिस अवरोधकों को तोड़ने की कोशिश की। बार-बार अनुरोध के बावजूद वे सड़क खाली करने को तैयार नहीं हुए, जिसके बाद उन्हें हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया।”

उन्होंने बताया कि लाठीचार्ज नहीं किया गया और प्रदर्शनकारियों ने मौके पर ही “सक्षम प्राधिकारी” को अपना ज्ञापन सौंप दिया। प्रदर्शन में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)-मार्क्सवादी लेनिनवादी (माले) लिबरेशन के विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में तेज बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया, “बिहार में छात्राएं, कामकाजी महिलाएं और लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। यह चिंताजनक स्थिति राज्य की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता को उजागर करती है।”

सौरभ ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है और मुख्यमंत्री आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।

उन्होंने कहा, “चुनाव के बाद महिलाओं के खिलाफ हिंसा में वृद्धि से स्पष्ट है कि सरकार अपराध रोकने के बजाय मामलों को दबाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने में लगी है।”

विधायक ने पटना में नीट अभ्यर्थी की हालिया मौत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “हम पटना उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश से न्यायिक जांच चाहते हैं। सीबीआई जांच केवल आरोपियों को बचाने के लिए कराई गई है।”

जहानाबाद की रहने वाली छात्रा छह जनवरी को पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू महिला छात्रावास में अचेत अवस्था में मिली थी।

कई दिनों तक कोमा में रहने के बाद 11 जनवरी को एक निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

परिवार ने छात्रा का यौन उत्पीड़न और अधिकारियों पर मामले को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।

पुलिस ने छात्रावास के एक कर्मचारी को बाद में गिरफ्तार भी किया था।

भाषा कैलाश जितेंद्र

जितेंद्र


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