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पटना, तीन मई (भाषा) जद (यू) प्रमुख नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार रविवार को बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के लिए रवाना हुए, जहां से वह अपने जनसंपर्क अभियान के तहत ‘सद्भाव यात्रा’ की शुरुआत करेंगे।
तुरही की ध्वनि तथा शंखनाद के बीच निशांत कुमार यहां पार्टी मुख्यालय से एक सजे-धजे वाहन में सवार होकर जिले के लिए रवाना हुए। इस दौरान समर्थकों ने उन पर फूल बरसाए।
पश्चिम चंपारण के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘मेरी पहली राजनीतिक यात्रा ‘सद्भाव यात्रा’ आज से शुरू हो रही है। ‘सद्भाव’ शब्द प्रेम और सकारात्मक भावनाओं का प्रतीक है। मैं सबको साथ लेकर चलूंगा, किसी को भी पीछे नहीं छोडूंगा।’’
पिछले महीने ही पार्टी में शामिल हुए 45 वर्षीय कुमार पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर से अपनी ‘‘सद्भाव यात्रा’’ शुरू करने वाले हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग दो दशक लंबे कार्यकाल के दौरान उनके पिता ने कई बार इस स्थान को अपनी कई यात्राओं के आरंभिक बिंदु के रूप में चुना था।
निशांत कुमार ने बताया कि यात्रा पर निकलने से पहले उन्होंने अपने पिता से आशीर्वाद लिया।
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम चंपारण वह भूमि है जहां महात्मा गांधी ने 1917 में दौरा किया था और अपना सत्याग्रह शुरू किया था। मेरे पिता ने भी अपनी सभी महत्वपूर्ण यात्राओं की शुरुआत यहीं से की।’’
जद (यू) नेता ने कहा कि वह पिछले दो दशकों में अपने पिता द्वारा किए गए कार्यों का प्रचार करेंगे और जो भी कार्य अब तक पूरे नहीं हुए हैं, उन्हें पूरा करने का काम करेंगे।
कुमार ने कहा, ‘‘मैं जद (यू) के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करूंगा, पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलूंगा और पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए उनकी राय लूंगा।’’
वहीं, कुमार और अन्य वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ पहुंचे जद (यू) विधायक दल के नेता श्रवण कुमार ने कहा कि ‘‘जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने’’ के उद्देश्य से आयोजित इस यात्रा के माध्यम से ‘‘प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश’’ फैलाया जाएगा।
नीतीश कुमार के अचानक मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उनके बेटे निशांत कुमार का देर से ही सही, लेकिन पार्टी में आना आशा की किरण लेकर आया है।
अचानक राज्यसभा जाने के नीतीश कुमार (75) के फैसले से लगे झटके से पार्टी अभी उबरने का प्रयास कर रही है। कुमार के बिहार की सत्ता छोड़ने से पार्टी के राजनीतिक प्रभाव में कमी आने की आशंका पैदा हो गई थी, हालांकि अब निशांत कुमार के रूप में उनके उत्तराधिकारी के आगमन ने पार्टी को राहत दी है। उनकी इस यात्रा को लेकर पार्टी ने एक आकर्षक नारा भी गढ़ा है।
‘‘जय निशांत, तय निशांत’’ का नारा अब जद (यू) के पोस्टरों के साथ-साथ सोशल मीडिया हैंडल पर भी छाया हुआ देखा जा सकता है।
‘सद्भाव यात्रा’ की शुरुआत की पूर्व संध्या पर जद (यू) के प्रवक्ता और विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) नीरज कुमार ने पश्चिम चंपारण के मुख्यालय बेतिया में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ‘‘निशांत का संबंध उस भूमि से है जहां सम्राट अशोक का जन्म हुआ था।’’
उन्होंने कहा कि अपने पिता की तरह वह भी ऋषि वाल्मीकि की भूमि से यात्रा शुरू कर रहे हैं।
नीरज कुमार ने कहा, ‘‘वाल्मीकि और अशोक दोनों ने त्याग का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया। हमारे सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार ने भी सत्ता त्यागकर अपने सिद्धांतों पर चलने का निर्णय लेकर त्याग की यही भावना दिखाई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता के प्रति वही त्याग का भाव निशांत ने भी दिखाया है। वह किसी भी समय नए मंत्रिमंडल या राज्य विधानमंडल में स्थान प्राप्त कर सकते थे। लेकिन उन्होंने शॉर्टकट से बचने और जनसंपर्क के आजमाए हुए तरीके से अपनी पहचान बनाने का विकल्प चुना।’’
जद (यू) प्रमुख के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नयी सरकार का गठन हुआ है।
नीरज कुमार ने कहा, ‘‘नीतीश कुमार हमेशा से अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता के प्रति ‘कतई बर्दाश्त नहीं’ की नीति का पालन करते आए हैं। नयी सरकार ने भी इसी नीति को अपना आदर्श वाक्य बनाया है। निशांत के रूप में हमें एक ऐसा नेता मिला है जो इस विरासत को आगे बढ़ाएगा।’’
भाषा सुरभि नेत्रपाल
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