पटना, तीन फरवरी (भाषा) बिहार में नीलगाय के कारण फसलों को हो रहे नुकसान का मुद्दा मंगलवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने उठाया।
विधायकों ने चिंता जताते हुए सरकार से पूछा कि हर साल हजारों एकड़ में खड़ी फसल को बर्बाद कर रही नीलगाय की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
इस पर संज्ञान लेते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने सदन को बताया कि विभाग ने जिलेवार ‘शूटर्स’ की सूची जारी कर दी है।
चंद्रवंशी ने कहा कि इस संबंध में पंचायत के मुखिया को भी अधिकृत किया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
मंत्री ने बताया कि सरकार की ओर से प्रति नीलगाय के आखेट के लिए 750 रुपये की राशि दी जाएगी, जिससे किसानों को राहत मिल सके।
विधानसभा में नीलगाय के कारण फसलों को होने वाले नुकसान पर चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया।
सिन्हा ने सदन के सदस्यों से ‘नीलगाय’ शब्द के प्रयोग से परहेज करने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन विभाग की ओर से इस जंगली जानवर का आधिकारिक नाम ‘घोड़पड़ास’ निर्धारित किया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने धार्मिक और तकनीकी पहलुओं का उल्लेख करते हुए इसी नाम के इस्तेमाल पर जोर दिया।
भाषा
कैलाश रवि कांत