‘हिरासत में युवक की मौत के बाद बवाल, भीड़ ने थाने पर किया हमला, सात पुलिसकर्मी गंभीर

‘हिरासत में मौत’ के बाद भीड़ ने थाने पर किया हमला, सात पुलिसकर्मी गंभीर Seven policemen critically injured as mob attacks police station

‘हिरासत में युवक की मौत के बाद बवाल, भीड़ ने थाने पर किया हमला, सात पुलिसकर्मी गंभीर
Modified Date: November 29, 2022 / 07:54 pm IST
Published Date: September 17, 2022 10:11 pm IST

कटिहार (बिहार),  बिहार के कटिहार जिले में कथित तौर पर हिरासत में एक व्यक्ति की मौत के कुछ घंटों बाद ग्रामीणों के समूह ने एक पुलिस थाने पर हमला कर दिया, जिसमें दो थाना प्रभारी (एसएचओ) सहित सात पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि 40 वर्षीय प्रमोद कुमार सिंह के हवालात में मृत पाए जाने के बाद सैकड़ों ग्रामीणों ने प्राणपुर थाने में हंगामा किया और परिसर में खड़े वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। शराब की बोतलें मिलने के बाद सिंह को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था।

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अधिकारी ने बताया कि दो घायल एसएचओ में प्राणपुर थाने के मनीतोष कुमार और दंडकोहरा थाने के शैलेश कुमार शामिल हैं। कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक (एसपी) दया शंकर ने बताया, ‘‘सभी घायल पुलिसकर्मियों को कटिहार के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और हमारी टीम इलाके में तैनात हैं।’’

शंकर ने दावा किया, ‘‘शव तब मिला जब पुलिस अधिकारी सिंह को अदालत में पेश करने के लिए दस्तावेज तैयार कर रहे थे।’’

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सिंह की मौत की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने लाठियों और लोहे की रॉड से थाने पर हमला कर दिया और पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया। शंकर ने कहा, ‘‘निकटतम पुलिस थानों से अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को बुलाए जाने के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका। शैलेश कुमार पुलिसकर्मियों की भेजी गई अतिरिक्त टीम में शामिल थे। दो एसएचओ सहित सात पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।’’

उन्होंने बताया कि सिंह के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिसकर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

बिहार सरकार ने पांच अप्रैल 2016 को राज्य में शराब के उत्पादन, व्यापार, भंडारण, परिवहन, बिक्री, खपत पर प्रतिबंध लगा दिया और बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 का उल्लंघन करने वालों के लिए इसे दंडनीय अपराध बना दिया, जिसे अब तक कई बार संशोधित किया जा चुका है।

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