पटना, तीन अप्रैल (भाषा) कांग्रेस की बिहार इकाई ने शुक्रवार को राज्य सरकार की बिजली से जुड़ी ‘टाइम ऑफ डे’ (टीओडी) शुल्क योजना और घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडरों की कथित कमी के विरोध में प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने राज्य की राजधानी पटना में आयकर गोलंबर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला फूंका।
बिहार विद्युत विनियामक आयोग (बीईआरसी) ने हाल ही में बिजली वितरण कंपनियों की मांग पर ‘टाइम ऑफ डे’ शुल्क योजना को मंजूरी दी है।
बीईआरसी ने बिजली के उपभोग के आधार पर दिन को तीन अवधियों में विभाजित किया है- सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ऑफ-पीक समय, शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक पीक समय, और रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक सामान्य लोड समय।
इस विभेदित मूल्य निर्धारण व्यवस्था में ऑफ-पीक से पीक समय की ओर दरें बढ़ती हैं।
संवाददाताओं से बातचीत में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा, “हम बिहार सरकार के बिजली दरों में बढ़ोतरी करने के फैसले के साथ-साथ एलपीजी सिलेंडरों की कमी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।’’
राम ने दावा किया कि इस आंदोलन में 2.21 करोड़ बिजली उपभोक्ता शामिल हैं, जिनमें 1.88 करोड़ घरेलू उपभोक्ता हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘125 यूनिट बिजली मुफ्त में देने का वादा करके वोट लेने के बाद सरकार अब एक अप्रैल से उपभोक्ताओं पर बोझ डाल रही है। टीओडी योजना के तहत शाम 5 बजे के बाद बिजली दरों में 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि होगी।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार ने कथित एलपीजी कमी के बीच लोगों से अधिक राजस्व जुटाने के लिए पीक समय में दरें बढ़ाई हैं।
राम ने कहा, ‘‘एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी के बीच, जब अधिकांश परिवार शाम के समय खाना बनाते हैं, तब बिहार सरकार ने बिजली की दरें बढ़ा दी हैं। सरकार जहां 125 यूनिट बिजली मुफ्त देने का दावा करती है, वहीं वह इससे कई गुना अधिक राजस्व वसूलने के लिए भारी शुल्क लगा रही है।’’
राम ने आरोप लगाया कि सरकार जनता के वोट ‘चुराने’ के बाद उनके खिलाफ ‘बदले की भावना’ से काम कर रही है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने नालंदा में भगदड़ की घटना और इसी जिले में एक लड़की से कथित मारपीट के मामले तथा राज्य में कथित जहरीली शराब से मौतों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाने का भी सरकार पर आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘जब बिहार में ‘गुंडा राज’ स्थापित हो रहा है, तब सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल राजनीतिक जोड़तोड़ और विधायकों की खरीद-फरोख्त में लगी है।’’
भाषा कैलाश संतोष
संतोष