पहनावा व्यक्तिगत पसंद का विषय, ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए : चिराग

Ads

पहनावा व्यक्तिगत पसंद का विषय, ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए : चिराग

  •  
  • Publish Date - August 26, 2026 / 08:12 PM IST,
    Updated On - August 26, 2026 / 08:12 PM IST

पटना, 26 अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बुधवार को कहा कि पोशाक व्यक्तिगत पसंद का मामला है और यह धार्मिक परंपराओं से निर्देशित होती है तथा “ऐसे मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।”

चिराग पासवान इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे, जिसमें प्रयागराज के एक स्कूल में स्कूल की वर्दी के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली एक छात्रा की याचिका खारिज कर दी गई थी।

हाजीपुर से सांसद पासवान ने कहा, ‘मैं समझ सकता हूं कि उच्च न्यायालय के फैसले से मुस्लिम समुदाय आहत महसूस कर रहा होगा। लेकिन मैं उनसे कहना चाहूंगा कि यह उच्च न्यायालय का फैसला है, जिसकी समीक्षा उच्च न्यायिक प्राधिकार द्वारा की जा सकती है।’

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 21 अगस्त के अपने आदेश में कहा था, ‘‘हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का आवश्यक हिस्सा नहीं है और एक महिला के हिजाब नहीं पहनने से आस्था खतरे में नहीं पड़ जाएगी।’’

पासवान ने कहा, ‘ऐसे मामलों में सबसे अच्छा तरीका यही है कि हस्तक्षेप न किया जाए। कोई हिजाब पहनता है, तो कोई घूंघट करता है। लोगों के पहनावे पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह व्यक्तिगत पसंद के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं से भी जुड़ा होता है।’

उन्होंने हाल में राज्यसभा में पहनावे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद सुष्मिता देव और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सांसद जॉन ब्रिटास के बीच हुए विवाद का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए कहा, ‘हमने संसद के भीतर लुंगी पहनने को लेकर दुर्भाग्यपूर्ण हंगामा देखा। मेरी पार्टी और मैं कभी भी ऐसे तंज का समर्थन नहीं करते।’

इस बीच, केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता गिरिराज सिंह ने अदालत के फैसले पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधा, जिन्होंने इस फैसले को ‘इस्लाम पर हमला’ बताया था।

बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह ने कहा, ‘ओवैसी अपने आपको क्या समझते हैं? क्या वे देश के कानून से ऊपर हैं? यदि उनका मानना है कि मुसलमानों पर संविधान नहीं, बल्कि शरीयत लागू होनी चाहिए, तो फिर उन्हें चोरी के आरोपियों के हाथ-पैर काटने जैसी सजा से भी सहमत होना चाहिए।’

ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया है कि उच्च न्यायालय का फैसला संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

भाषा कैलाश अमित

अमित