अपीलीय न्यायाधिकरण ने पांशुल एग्रो फूड की दिवाला याचिका खारिज की

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अपीलीय न्यायाधिकरण ने पांशुल एग्रो फूड की दिवाला याचिका खारिज की

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  • Publish Date - August 26, 2026 / 08:14 PM IST,
    Updated On - August 26, 2026 / 08:14 PM IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने पांशुल एग्रो फूड की याचिका को खारिज कर दिया है। कंपनी को दिवाला प्रक्रिया में लाने के लिए दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 10 के तहत याचिका दायर की गयी था।

न्यायाधिकरण ने कहा कि यह याचिका दुर्भावनापूर्ण मंशा से दायर की गयी थी।

एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की अहमदाबाद पीठ के आदेश को बरकरार रखा। एनसीएलटी ने याचिका खारिज करने के साथ कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

हालांकि, अपीलीय न्यायाधिकरण ने मामले के हिसाब से जुर्माना अधिक होने का हवाला देते हुए आदेश में जुर्माने की राशि को घटाकर पांच लाख रुपये कर दिया।

एनसीएलएटी ने कहा, ‘‘हम एनसीएलटी के इस निष्कर्ष से सहमत हैं कि संहिता की धारा 10 के तहत आवेदन दुर्भावनापूर्ण मंशा से दायर किया गया था और इसलिए इसे खारिज किया गया है।’’

अपीलीय न्यायाधिकरण ने अपीलकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया कि केवल कर्ज और चूक साबित होने पर एनसीएलटी याचिका स्वीकार करने के लिए बाध्य था।

एनसीएलएटी ने कहा कि ऐसी याचिकाओं की वास्तविक मंशा की जांच करना न्यायाधिकरण का कर्तव्य है। वह केवल ‘रबड़ स्टाम्प की तरह’ काम नहीं कर सकता।

पांशुल एग्रो फूड एलएलपी ने 42.20 करोड़ रुपये की चूक का हवाला देते हुए अपने खिलाफ कॉरपोरेट ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) शुरू करने की मांग की थी।

आईबीसी की धारा 10 किसी कर्जदार कंपनी को चूक होने की स्थिति में खुद के खिलाफ दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देती है।

वहीं, धारा 65 स्वैच्छिक दिवाला कार्यवाही को धोखाधड़ी या दुर्भावनापूर्ण तरीके से शुरू करने से संबंधित है। इसके तहत एनसीएलटी एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 2019 में पांशुल एग्रो फूड को 28.44 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा दी थी, जिसे जुलाई, 2024 में बढ़ाकर 40.19 करोड़ रुपये कर दिया गया। कंपनी के खाते को 18 अप्रैल, 2025 को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित किया गया।

एसबीआई ने 20 जून, 2025 को सरफेसी (वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण तथा प्रतिभूति हित प्रवर्तन) अधिनियम की धारा 13(2) के तहत नोटिस जारी किया और 20 अगस्त, 2025 को ऋण वसूली न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया।

इसके छह दिन बाद 26 अगस्त, 2025 को कंपनी ने आईबीसी की धारा 10 के तहत याचिका दायर की।

एनसीएलएटी ने कहा कि फरवरी, 2026 में बैंक के निरीक्षण के दौरान कारखाने से कई संयंत्र और मशीनरी गायब मिलीं, जबकि मई, 2025 में हुए पिछले निरीक्षण के दौरान ये वहां मौजूद थीं।

कंपनी इस स्थिति को स्पष्ट करने के लिए खरीद संबंधी चालान या अचल संपत्ति रजिस्टर भी पेश नहीं कर सकी।

न्यायाधिकरण ने कहा, ‘‘वसूली कार्यवाही लंबित रहने के दौरान ऋणदाता की सहमति के बिना बंधक रखी गई परिसंपत्तियों को हटाना गंभीर मामला है, जो सीधे तौर पर कर्जदाताओं के हितों को नुकसान पहुंचाता है।’’

भाषा रमण अजय

अजय