पटना, 28 सितंबर (भाषा) बिहार में आगामी विधान परिषद चुनाव से पहले जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सोमवार को आरोप लगाया कि पिछले पांच से सात वर्षों में निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों से उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
पत्रकारों से बातचीत में किशोर ने कहा कि हाल में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल को लेकर आई एक खबर ने चर्चा जरूर शुरू की है, लेकिन लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनसे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहे राजीव कुमार बाद में 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक बाजार पूंजीकरण वाले एक प्रतिष्ठित निजी बैंक के अध्यक्ष बन गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे यह संदेश जाता है कि सरकार की मदद करने वालों के लिए बाद में आकर्षक पद सुरक्षित रहते हैं।
किशोर ने कहा कि केवल एक व्यक्ति को हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता लगातार कमजोर हुई है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने, चुनाव की तारीखें और चरण तय करने तथा आदर्श आचार संहिता लागू करने जैसे मामलों में आयोग पर सत्तारूढ़ दल के पक्ष में काम करने के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा बहाल करने के लिए अधिक पारदर्शिता जरूरी है।
जन सुराज के नेता ने यह आरोप भी दोहराया कि वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू रहने के बावजूद निर्वाचन आयोग ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को 10-10 हजार रुपये देने की अनुमति दी।
उन्होंने दावा किया कि इसका उद्देश्य करीब डेढ़ करोड़ मतदाताओं को प्रभावित करना था। उनका इशारा चुनाव से पहले योजना की पहली किस्त के वितरण की ओर था।
किशोर ने कहा कि वह और अन्य विपक्षी नेता लंबे समय से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल में आई खबर से यह संकेत भी मिला कि आयोग के भीतर मतभेद थे।
बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोगों को समझना चाहिए कि उन्होंने नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट दिया था, लेकिन इसके परिणामस्वरूप बिहार को एक अशिक्षित मुख्यमंत्री मिला।
उन्होंने आगामी विधान परिषद चुनाव में जन सुराज के उम्मीदवारों के समर्थन की अपील करते हुए कहा कि बिहार के शिक्षक और स्नातक मतदाताओं पर राज्य में सुधार लाने की विशेष जिम्मेदारी है।
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है। इनमें चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटें शामिल हैं, जिनका कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
किशोर ने कहा कि जिस तरह बैंकीपुर उपचुनाव में मतदाताओं ने भाजपा सरकार को संतुलित करने का प्रयास किया था, उसी तरह उन्हें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के बजाय जन सुराज के उम्मीदवारों का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल को वोट देने का सवाल ही नहीं उठता।
इस बीच, जन सुराज ने एक बार फिर अपने उम्मीदवार में बदलाव करते हुए दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से मोहम्मद इम्तियाज (नूरानी) को आगामी विधान परिषद चुनाव के लिए नया प्रत्याशी घोषित किया है।
पार्टी की ओर से सोमवार को जारी बयान के अनुसार, दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पहले घोषित उम्मीदवार रवींद्र यादव की जगह अब मोहम्मद इम्तियाज (नूरानी) चुनाव लड़ेंगे।
इससे पहले पार्टी ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार भूषण झा की जगह श्याम नंदन यादव को नया प्रत्याशी बनाया था।
भाषा
कैलाश रवि कांत